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अजमेर में अतिक्रमण विरोध हिंसा का शिकार पूर्व सरपंच की मौत, वीडियो में देंखे समाज में तनाव

 

जिले के डूमाड़ा क्षेत्र में छह दिन पहले अतिक्रमण का विरोध करने के दौरान बोलेरो चढ़ाने की घटना में घायल हुए पूर्व सरपंच गोविंदराम गुर्जर की बुधवार सुबह जेएलएन अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही गुर्जर समाज और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।

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सूचना मिलते ही अस्पताल की मॉर्च्यूरी के पास बड़ी संख्या में समाज के लोग और ग्रामीण एकत्रित हो गए। मृतक के परिवार और समाज ने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए विरोध शुरू किया। लोग नाराजगी जताते हुए अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।

इस दौरान देवनारायण बोर्ड के चेयरमेन ओमप्रकाश भडाणा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मुझे हल्के में लिया और अब मैं सभी दायित्व और मर्यादा को छोड़कर लोगों के बीच खड़ा हूं। उनकी उपस्थिति ने प्रदर्शन में और मजबूती ला दी।

प्रदर्शनकारी और मृतक के परिवार ने अस्पताल प्रशासन और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की। कुछ समय के लिए ट्रॉमा वार्ड के पास लोगों ने नारेबाजी भी की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग को जोर-शोर से उठाया।

घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा रखने की अपील की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ विरोध में हिंसा और ऐसी गंभीर घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था की चुनौती पेश करती हैं। स्थानीय नेतृत्व और प्रशासन की भूमिका इस समय बेहद महत्वपूर्ण हो गई है ताकि तनाव को नियंत्रित किया जा सके और आगे की घटनाओं को रोका जा सके।

गोविंदराम गुर्जर की मौत ने पूरे इलाके में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। ग्रामीण और समाज के लोग प्रदर्शन में शामिल होकर न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं को गंभीरता से देखा जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अतिक्रमण और स्थानीय प्रशासन के फैसलों को लेकर असहमति हिंसा का रूप ले सकती है। पुलिस और प्रशासन को स्थानीय समुदाय के साथ संवाद स्थापित कर स्थिति को शांत करने की आवश्यकता है।

अजमेर के स्थानीय समाज और प्रशासन अब इस घटना को नियंत्रित करने और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने में जुट गए हैं। मृतक के परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों को कानून के अनुसार दंडित करने की मांग पूरे समुदाय द्वारा जोर-शोर से उठाई जा रही है।