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अजमेर में BJP को बड़ा झटका, 36 साल का रिकॉर्ड टूटा; देवनानी-भदेल के इलाकों में भी सीटों का नुकसान

 

अजमेर शहर में नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका दिया है। शहर की राजनीति में लंबे समय से मजबूत स्थिति रखने वाली भाजपा इस बार स्पष्ट बहुमत हासिल करने से चूक गई। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अजमेर में उसका 36 साल पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया। खास बात यह है कि भाजपा के दो प्रमुख विधायक वासुदेव देवनानी और अनीता भदेल के विधानसभा क्षेत्रों में भी पार्टी को पिछली बार के मुकाबले सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

अजमेर शहर की राजनीति में भाजपा का प्रभाव लंबे समय से रहा है। पार्टी लगातार नगर निकाय चुनावों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही थी। ऐसे में इस बार के परिणामों को भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। विधानसभा में पार्टी के पास शहर का प्रतिनिधित्व करने वाले दो प्रमुख विधायक होने के बावजूद नगर निकाय चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं हो सका।

चुनाव परिणामों में भाजपा बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। इसके चलते अब नगर निगम में बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण हो गए हैं। बहुमत नहीं होने की स्थिति में भाजपा को अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में निर्दलीय और अन्य दलों से जीतकर आए पार्षदों की भूमिका बढ़ गई है।

सबसे अहम बात यह है कि पिछले चुनाव से तुलना करने पर भाजपा को दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सीटों का नुकसान हुआ है। वासुदेव देवनानी और अनीता भदेल के क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन में आई गिरावट को स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय माना जा रहा है। दोनों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव के नतीजों का कमजोर रहना पार्टी के लिए मंथन का कारण बन सकता है।

चुनावी नतीजों के बाद अब भाजपा के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के बावजूद नगर निगम में स्पष्ट बहुमत क्यों नहीं मिला और किन वार्डों में पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, इसकी समीक्षा की जा सकती है। स्थानीय संगठन, प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा होने की संभावना है।

दूसरी ओर, भाजपा विरोधी दलों और निर्दलीय पार्षदों के लिए यह परिणाम राजनीतिक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। यदि विरोधी खेमे के पार्षद एकजुट होते हैं तो नगर निगम में बोर्ड गठन का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्षदों के बीच समर्थन जुटाने और राजनीतिक बातचीत का दौर तेज होने की संभावना है।

अजमेर के नतीजे भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह शहर राजस्थान की राजनीति में खास स्थान रखता है। यहां पार्टी का लंबे समय से प्रभाव रहा है और विधानसभा में भी उसके दो विधायक हैं। इसके बावजूद नगर निकाय चुनाव में बहुमत से दूर रहना स्थानीय संगठन और नेतृत्व के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा बोर्ड गठन के लिए किस रणनीति पर आगे बढ़ती है। साथ ही पार्टी के शीर्ष और स्थानीय नेतृत्व की ओर से चुनाव परिणामों की समीक्षा किस तरह की जाती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अजमेर नगर निगम के परिणामों ने भाजपा के 36 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए शहर की राजनीति में नए समीकरणों की जमीन तैयार कर दी है।