अजमेर में घर में प्रभु यीशु मसीह की प्रार्थना को लेकर विवाद, बजरंग दल ने जताई आपत्ति
अजमेर के पलटन बाजार में एक हिंदू महिला के घर में प्रभु यीशु मसीह की आराधना प्रार्थना को लेकर विवाद पैदा हो गया है। इस घटना ने राजस्थान में हाल ही में लागू धर्मांतरण कानून को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्थानीय लोग और हिंदूवादी संगठन बजरंग दल को सूचना मिली कि महिला के घर में ईसाई प्रार्थना की जा रही है। बजरंग दल ने इस प्रार्थना पर आपत्ति जताई और इसके खिलाफ प्रदर्शन व विरोध दर्ज कराया। इसके बाद संगठन के कार्यकर्ता और महिला के परिजन मिलकर सिविल लाइन थाने पहुंचे और मामले को लेकर पुलिस को अवगत कराया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और दोनों पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन इस विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास कर रहा है। थाने के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मामले में आगे की अटकलों और हिंसा से दूर रहें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद राजस्थान में नए धर्मांतरण कानून को लेकर चल रही बहस में और गर्मी ला सकता है। कानून के अनुसार किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन या प्रार्थना गतिविधियों को लेकर यदि शिकायत आती है तो कानूनी कार्रवाई संभव है। इस मामले में पुलिस की जांच और निष्पक्ष कार्रवाई ही विवाद को शांत कर सकती है।
स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर भी इस विवाद की खबर तेजी से फैल रही है। कई लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के दायरे के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा बता रहे हैं। वहीं, धार्मिक संगठनों का कहना है कि कानून का उद्देश्य अन्यायपूर्ण धर्मांतरण और दबाव को रोकना है।
वहीं, महिला के परिवार और समर्थकों ने इस प्रार्थना को धार्मिक आस्था और निजी स्वतंत्रता के दायरे में बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने घर में पूजा-अर्चना करने से रोका नहीं जा सकता। इस बयान ने विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामले अक्सर स्थानीय और धार्मिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले में कानूनी और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना होगा ताकि किसी भी तरह की हिंसा या सामाजिक अशांति पैदा न हो।
अजमेर प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मामले की जांच पूरी होने तक कोई भी पक्ष सड़कों पर प्रदर्शन या हिंसा नहीं करेगा, और सभी को कानून का पालन करना होगा। अधिकारियों ने कहा कि जांच के आधार पर सटीक और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
इस विवाद ने राजस्थान में धर्मांतरण कानून, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक संतुलन को लेकर बहस को फिर से हवा दे दी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस दोनों ही मामले को शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से हल करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।