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अजमेर शरीफ दरगाह का इतिहास: 800 साल से ज्यादा पुरानी है ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह, मुगल बादशाहों ने भी कराया निर्माण

 

अजमेर शरीफ दरगाह राजस्थान के अजमेर शहर की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है। यहां सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार यह भारत के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा इतिहास

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ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस से भारत आए सूफी संत थे। वे 12वीं शताब्दी के अंत में अजमेर पहुंचे और 1192 से 1236 ईस्वी तक अजमेर में रहे। 1236 ईस्वी में उनके निधन के बाद उनकी मजार को प्रमुख सूफी धार्मिक स्थल के रूप में सम्मान मिला।

ख्वाजा साहब को गरीब नवाज के नाम से भी जाना जाता है। उनकी चिश्ती सूफी परंपरा प्रेम, सेवा, करुणा और मानवता के संदेश के लिए जानी जाती है।

मुगल शासकों का भी था गहरा जुड़ाव

अजमेर शरीफ दरगाह के विकास में मुगल शासकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजस्थान पर्यटन के अनुसार हुमायूं ने संत की याद में दरगाह का निर्माण कराया। बाद में अकबर और शाहजहां ने दरगाह परिसर में मस्जिदों का निर्माण कराया।

अकबर की दरगाह के प्रति विशेष आस्था बताई जाती है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार वे हर साल अजमेर की यात्रा करते थे।

दरगाह के प्रमुख दरवाजे

अजमेर शरीफ दरगाह परिसर में कई ऐतिहासिक प्रवेश द्वार हैं। इनमें निजाम गेट, शाहजहां गेट और बुलंद दरवाजा प्रमुख हैं। दरगाह के मुख्य हिस्से में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार स्थित है। मजार के आसपास संगमरमर और चांदी से बनी सजावट देखने को मिलती है।

उर्स में उमड़ता है जायरीनों का सैलाब

हर साल ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि की स्मृति में उर्स आयोजित किया जाता है। यह अजमेर शरीफ के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। उर्स के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन अजमेर पहुंचते हैं।

दरगाह की परंपरा में चादर चढ़ाना, दुआ करना और कव्वाली सुनना प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।

बड़ी देग और छोटी देग भी प्रसिद्ध

दरगाह परिसर में रखी विशाल देगों का भी विशेष महत्व है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार यहां बड़ी कड़ाहियों में भोजन तैयार कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

अजमेर शरीफ की सबसे खास पहचान यह है कि यहां केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों से जुड़े लोग भी पहुंचते हैं। राजस्थान पर्यटन इसे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में प्रस्तुत करता है।

क्यों खास है अजमेर शरीफ?

  • ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार
  • चिश्ती सूफी परंपरा का प्रमुख केंद्र
  • मुगल काल से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत
  • निजाम गेट, शाहजहां गेट और बुलंद दरवाजा
  • उर्स के दौरान देश-विदेश से जायरीन
  • बड़ी और छोटी देग की परंपरा
  • विभिन्न धर्मों के लोगों की आस्था का केंद्र

अजमेर शरीफ दरगाह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राजस्थान की सदियों पुरानी सूफी, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।