Agra 20 साल बाद दर्ज हुआ एसिड अटैक का केस, पीड़िता ने एडीजी जोन को बताई दर्द भरी दास्तां, पुलिस कमिश्नर ने लिखवाई रिपोर्ट
उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क अग्रसेन पुरम, पीलाखार निवासी रुकैया (34) एसिड अटैक सर्वाइवर है. वह जब 14 साल की थी तब उसके साथ दिल दहला देने वाली घटना हुई थी. चेहरा और शरीर तेजाब से बुरी तरह जल गया. जान तो बच गई मगर चेहरा खराब हो गया. आरोपित बड़ी बहन का देवर है. उस समय परिवार के दबाव में मुकदमा नहीं लिखाया. 20 साल बाद शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है.
रुकैया फतेहाबाद मार्ग स्थित शीरोज हैंग आउट कैफे में जॉब करती हैं. मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था इसलिए उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिल पाई. घटना के समय परिवारीजनों की प्राथमिकता उनका इलाज थी. उस समय परिवारीजन नहीं चाहते थे कि एक बेटी को इंसाफ दिलाने में दूसरी का घर बिगड़ जाए. बाद में भाई ने प्रयास भी किया मगर पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा. पिछले दिनों एसिड अटैक सर्वाइवर एडीजी जोन राजीव कृष्ण से मिले थे. रुकैया ने अपना दर्द उनके समक्ष बयां किया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि उसकी बात सुनी जाएगी. मामला पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह तक पहुंचा. उनके निर्देश पर एत्मादुद्दौला थाने में मुकदमा लिखा है.
कोई सरकारी मदद नहीं मिली शीरोज हैंग आउट कैफे के फाउंडर आशीष शुक्ला ने बताया कि सरकार द्वारा एसिड अटैक सर्वाइवर को कई सहायता प्रदान की जाती हैं. इसके लिए मेडिकल और मुकदमा होना जरूरी है. रुकैया इन सभी से वंचित है. वह पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने एक पीड़िता के दर्द को समझा.
बहन के देवर ने डाला था तेजाब
रुकैया ने पुलिस को बताया कि वह अपनी बहन इसरत जहां की ससुराल मसानी का नगला, शाहजहां माल तुर्कमान गेट के पास कोतवाली, अलीगढ़ गई थी. वहां सात सितंबर 2002 को रात करीब आठ बजे बहन के देवर आरिफ पुत्र हनीफ ने उस पर तेजाब फेंका था. शरीर पर तेजाब गिरते ही वह जलन से चीख उठी. दिखाई देना बंद हो गया. घरवाले उसे अस्पताल लेकर गए. सालों उसका इलाज चला. अब जिंदगी जीने के लिए खुद संघर्ष कर रही है. रुकैया को वर्ष 2014 में शीरोज हैंग आउट कैफे की जानकारी हुई. वह वहां पहुंची. वहां उसे जीने की नई राह मिली.
आगरा न्यूज़ डेस्क