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43 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची थोक महंगाई, वीडियो में जाने मई में WPI बढ़कर 9.68% हुई; ईंधन और खाद्य वस्तुओं ने बढ़ाई चिंता

 

देश में महंगाई को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। मई महीने में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले अप्रैल में थोक महंगाई 8.26 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़े जारी किए।आंकड़ों के अनुसार, मई में थोक महंगाई में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70 प्रतिशत के स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद यह पहली बार है जब महंगाई दर इतनी ऊंचाई पर पहुंची है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के साथ-साथ उद्योग जगत की चिंता भी बढ़ा दी है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, महंगाई बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं, ईंधन और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर थोक महंगाई पर पड़ा है। इसके अलावा अनाज, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से भी महंगाई दर में तेजी आई है।वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को ऊपर धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गेहूं, चावल, दालों और खाद्य तेलों के दामों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वहीं ईंधन की बढ़ती लागत का असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है, जिससे अन्य वस्तुएं भी महंगी हो रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह मानी जा रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब साढ़े तीन महीनों से जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ रहा है।अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन उत्पादों की लागत बढ़ने से महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी दिखाई देने लगा है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर परिवहन और दैनिक उपयोग की कई चीजों की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। यदि आने वाले महीनों में भी यही रुझान जारी रहता है तो उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ वैश्विक परिस्थितियों के साथ घरेलू बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में खाद्य आपूर्ति, मानसून की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार का रुख महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।