मार्च में थोक महंगाई 3.88% पर पहुंची, 38 महीने का रिकॉर्ड टूटा, वीडियो में जानें रोजाना जरूरत का सामान और फ्यूल हुआ महंगा
देश में महंगाई को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। मार्च महीने में थोक महंगाई दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो फरवरी में 2.13 प्रतिशत थी। इस तरह एक महीने के भीतर इसमें 1.75 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा 15 अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह थोक महंगाई का पिछले 38 महीनों का उच्च स्तर है। इससे पहले जनवरी 2023 में थोक महंगाई दर 4.73 प्रतिशत तक पहुंची थी। सिर्फ थोक महंगाई ही नहीं, खुदरा महंगाई में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मार्च में रिटेल महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि फरवरी में यह 3.21 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि महंगाई का दबाव अब धीरे-धीरे आम लोगों तक भी पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई में यह बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है। खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, जहां इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, उसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ रहा है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में बाधाएं भी महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरते हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। इससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। सरकार और रिजर्व बैंक के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्हें एक तरफ महंगाई को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है।