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अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग का असर, वीडियो में जाने शेयर बाजार में भारी गिरावट, तेल की कीमतें आसमान छूने को तैयार

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखा गया। 2 मार्च को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स 1,500 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 79,800 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी में करीब 450 अंकों की कमी दर्ज हुई और यह 24,700 के स्तर पर पहुंच गया।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव और मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति है। जब निवेशकों को किसी प्रकार का संकट नजर आता है, तो वे असुरक्षित महसूस करते हैं और अपने शेयर बेचकर उन्हें सोने, चांदी और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों में स्थानांतरित कर देते हैं। इस प्रक्रिया से शेयर बाजार में तेजी से गिरावट आती है।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भी बाजार की कमजोरी का एक कारण बनी है। आज ब्रेंट क्रूड की कीमत में 10% की वृद्धि हुई और यह 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। इस बढ़ोतरी के कारण विशेष रूप से एनर्जी और ऑटोमोटिव सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। ऊर्जा कंपनियों और ऑटोमोटिव सेक्टर के निवेशक इस समय दबाव में हैं, क्योंकि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से उनकी उत्पादन लागत और लाभ मार्जिन प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजराइल-अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहरा हुआ, तो वैश्विक तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे न केवल भारतीय बाजार, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार और उपभोक्ताओं पर भी सीधा असर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की संभावना और उत्पादन लागत में वृद्धि के चलते कंपनियों का मुनाफा घट सकता है। ऐसे में निवेशक और अधिक सतर्क हो जाते हैं, जिससे बाजार में और गिरावट आ सकती है।

शेयर बाजार की यह गिरावट केवल निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी गंभीर संकेत देती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। वहीं, वित्तीय विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस समय में लंबे समय के निवेश पर ध्यान दिया जाए और तात्कालिक उतार-चढ़ाव के हिसाब से निर्णय लेने से बचा जाए।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के शेयर बाजार में यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, अगर वैश्विक तनाव कम होता है और मध्य पूर्व में स्थिति नियंत्रण में आती है। इसके साथ ही, निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे गोल्ड, सिल्वर और सरकारी बॉन्ड में अपने निवेश बढ़ाकर जोखिम कम कर सकते हैं।

इस प्रकार, 2 मार्च के दिन अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बहुप्रतीक्षित स्तरों से नीचे कारोबार होने के साथ-साथ तेल और ऊर्जा सेक्टर के शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और तेल की कीमतों पर टिकी हुई है, क्योंकि आगे की दिशा बाजार और महंगाई दोनों के लिए निर्णायक साबित होगी।