UPI MDR Update: यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने का फैसला टला, दिवाली के बाद लागू हो सकता है नया नियम
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रस्तावित तारीख आगे बढ़ा दी है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन अब इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की योजना बताई जा रही है। नई तारीख का ऐलान अलग से किया जाएगा।
इस फैसले से त्योहारों के दौरान दुकानदारों और कारोबारियों को राहत मिल सकती है। दिवाली के समय बाजारों, रेस्टोरेंट और दूसरी दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में नई भुगतान लागत लागू करने से कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता था।
MDR लागू करने का फैसला क्यों टला?
यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने की तारीख आगे बढ़ाने के पीछे तीन प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं।
- त्योहारी सीजन: दिवाली के दौरान खरीदारी और डिजिटल लेन-देन बढ़ते हैं। ऐसे में कारोबारियों को नई लागत से बचाने के लिए नियम को टालने की बात सामने आई है।
- कारोबारियों का विरोध: खुदरा व्यापार से जुड़े संगठनों ने प्रस्तावित शुल्क पर आपत्ति जताई थी। कुछ संगठनों ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का आह्वान भी किया था।
- तैयारी के लिए अतिरिक्त समय: नियम लागू होने से पहले दुकानदारों और भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों को जरूरी बदलाव करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
बताया गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद कारोबारियों ने अपना विरोध वापस ले लिया था। हालांकि, शुल्क लागू होने की अंतिम तारीख की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।
क्या है MDR और किसे देना पड़ता है शुल्क?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी संस्था को देना पड़ सकता है। यह शुल्क सीधे ग्राहक से लेने के बजाय मर्चेंट पर लागू होता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाने की बात कही गई है। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के कुछ लेन-देन पर लागू होना प्रस्तावित है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है।
इसका मतलब है कि प्रस्तावित नियम सभी यूपीआई पेमेंट पर लागू नहीं होगा। दुकानों और कारोबारियों को किए जाने वाले चुनिंदा भुगतान ही इसके दायरे में आ सकते हैं।
कुछ ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये शुल्क का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ विशेष श्रेणियों के भुगतान, जैसे बिल पेमेंट, फ्यूल और शिक्षा से जुड़े चुनिंदा ट्रांजैक्शन के लिए 5 रुपये का फ्लैट शुल्क भी बताया गया है। हालांकि, इसकी सटीक लागू होने वाली श्रेणियों और शर्तों की पुष्टि आधिकारिक दिशानिर्देशों से करना जरूरी है।
दोस्तों या परिवार के सदस्यों को किए जाने वाले सामान्य पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांसफर को मर्चेंट पेमेंट के समान नहीं समझना चाहिए।
सितंबर में UPI ट्रांजैक्शन का नया रिकॉर्ड
भारत में यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में यूपीआई के जरिए कुल 24.07 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल इसी महीने के 19.63 अरब ट्रांजैक्शन से 22.6% अधिक हैं।
इस दौरान यूपीआई ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 29.37 लाख करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर 18% की बढ़ोतरी दर्शाती है। औसतन हर दिन करीब 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी दैनिक वैल्यू लगभग 97,913 करोड़ रुपये रही।
दिवाली के बाद हो सकता है अंतिम फैसला
फिलहाल MDR लागू करने की प्रस्तावित तारीख आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। नई तारीख और शुल्क से जुड़ी अंतिम शर्तों के लिए NPCI की आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी। तब तक प्रस्तावित शुल्क को सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू नियम मानना सही नहीं होगा।