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UP Farmer Scheme: किसान की दुर्घटना में मौत पर परिवार को मिल सकती है 5 लाख तक की मदद, जानें पात्रता और आवेदन का तरीका
 

 

उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी से जुड़े परिवारों के लिए सरकार की कृषक दुर्घटना कल्याण योजना आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से चलाई जाती है। खेती के दौरान या अन्य परिस्थितियों में दुर्घटना होने पर किसान या उसके आश्रित परिवार को निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक सहायता मिल सकती है।

इस योजना का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में किसान के परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है। हालांकि, लाभ पाने के लिए पात्रता और दस्तावेजों से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
किन किसानों को मिल सकता है लाभ?
यह योजना उत्तर प्रदेश के पात्र किसानों और उनके आश्रितों के लिए है। सामान्य तौर पर लाभ के लिए किसान का नाम संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होना और जमीन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होना जरूरी होता है।

कुछ परिस्थितियों में बटाईदार या अन्य तरीके से खेती करने वाले पंजीकृत किसानों को भी योजना के दायरे में शामिल किया जा सकता है। इसलिए दुर्घटना की स्थिति में अपने रिकॉर्ड और स्थानीय प्रशासन से पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है।
मृत्यु होने पर कितनी आर्थिक सहायता?
योजना के तहत पात्र किसान की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलने का प्रावधान है।
वहीं दुर्घटना के कारण स्थायी दिव्यांगता या शरीर के किसी अंग को नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता राशि दी जाती है। सहायता की राशि चोट या दिव्यांगता की स्थिति और निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय होती है।
आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी?
दुर्घटना के बाद योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित मामले के अनुसार कई दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इनमें आमतौर पर एफआईआर या पंचायतनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और जमीन से संबंधित खतौनी जैसे दस्तावेज शामिल होते हैं।
आवेदक को निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय में दावा प्रस्तुत करना होता है। इसलिए दुर्घटना के बाद दस्तावेज जुटाने और आवेदन प्रक्रिया में देरी नहीं करनी चाहिए।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
योजना के तहत सहायता पाने के लिए पात्रता, दुर्घटना की स्थिति, दस्तावेज और आवेदन की समयसीमा जैसी शर्तें लागू होती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र के संबंधित तहसील या राजस्व अधिकारी से मौजूदा नियमों और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर ले लें।
सभी कागजात सही और समय पर जमा होने के बाद पात्रता के अनुसार सहायता राशि जारी की जाती है।