ट्रंप के ईरान बयान से बाजार क्रैश: सेंसेक्स 1,000 पॉइंट गिरा, 8 हफ्तों से जारी गिरावट ने डूबाए ₹6 लाख करोड़
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को कारोबार की शुरुआत से ही भारी बिकवाली देखने को मिली। पिछले सप्ताह लगातार सातवें हफ्ते लाल निशान में बंद हुए बाजार पर आज भी दबाव बना हुआ है। सेंसेक्स में करीब 1000 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों तक फिसल गया। बैंकिंग और FMCG समेत कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 476 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया। यानी शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की वेल्थ में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी देखने को मिली।
आखिर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?
शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक वजहें बताई जा रही हैं। खास तौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की धारणा पर दबाव डाल रहे हैं।
1. अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर दुनियाभर के वित्तीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि रूस और यूक्रेन के बीच भी तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं।
ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले एसेट्स को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं। इसका असर उभरते बाजारों, जिसमें भारतीय शेयर बाजार भी शामिल है, पर देखने को मिल सकता है।
2. कच्चा तेल फिर 105 डॉलर के पार
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए एक और चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड करीब 105-106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो इससे देश के इंपोर्ट बिल पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही महंगाई और रुपये पर भी असर पड़ने की चिंता रहती है।
वहीं, अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं घटती हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। लेकिन फिलहाल बाजार इस मोर्चे पर वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने पर डॉलर आधारित निवेश अपेक्षाकृत ज्यादा आकर्षक हो सकता है। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालने का रुख अपना सकते हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी ब्याज दर, महंगाई और बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलावों पर भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की नजर रहती है।
सेंसेक्स के ज्यादातर शेयरों में दबाव
सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बैंकिंग और FMCG शेयरों में कमजोरी खास तौर पर नजर आई। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बड़ी वजह
भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सात दिनों में FII/FPI ने करीब 10,914 करोड़ रुपये के शेयरों की नेट बिकवाली की है। वहीं इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 13,601 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की।
इससे पता चलता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बिकवाली के बीच बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी अभी भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है।
पिछले सप्ताह भी बाजार में गिरावट
25 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में भी भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। पूरे सप्ताह में निफ्टी करीब 206 अंक यानी 0.9 फीसदी गिरकर 23,141 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं सेंसेक्स करीब 400 अंक यानी 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ 73,896 के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि शुक्रवार को बाजार में तेजी देखने को मिली थी, लेकिन पूरे सप्ताह का प्रदर्शन कमजोर रहा।
गिरते बाजार के बीच आज खुले 2 IPO
एक तरफ सेकेंडरी मार्केट में गिरावट देखने को मिल रही है, तो दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट में नए IPO की गतिविधियां जारी हैं। सोमवार, 28 सितंबर से SRIT India और Shah Investor's Home के IPO निवेश के लिए खुले हैं।
SRIT India का IPO करीब 218.40 करोड़ रुपये का है और इसकी प्राइस बैंड 123 से 130 रुपये प्रति शेयर है। वहीं Shah Investor's Home IPO के जरिए करीब 90.17 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है और इसकी प्राइस बैंड 159 से 167 रुपये प्रति शेयर है। दोनों IPO में 30 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है।
एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख
भारतीय बाजार की कमजोरी के बीच एशियाई बाजारों में भी कारोबार पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। कुछ प्रमुख इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली, जबकि कुछ बाजार बढ़त में रहे। ऐसे में ग्लोबल मार्केट का रुख भी भारतीय बाजार के लिए अहम बना हुआ है।
आगे किन चीजों पर रहेगी नजर?
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर-रुपया और FII की खरीद-बिकवाली पर रहेगी।
अगर वैश्विक तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आती है, तो बाजार की धारणा में बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, अगर तेल की कीमत और वैश्विक तनाव ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।फिलहाल शेयर बाजार में तेज गिरावट के बीच निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि बाजार की दिशा केवल एक फैक्टर से नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश, कच्चे तेल और ब्याज दरों समेत कई संकेतकों से प्रभावित हो रही है।