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NSE IPO का इंतजार खत्म! प्राइस बैंड और डेट्स कन्फर्म, जानिए रिटेल निवेशकों के लिए क्या है खास

 

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का IPO लॉन्च होने जा रहा है। मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिलने के बाद IPO की सब्सक्रिप्शन तारीख और प्राइस बैंड तय कर दिया गया है। निवेशक 17 सितंबर से इसमें बोली लगा सकेंगे।

17 सितंबर से शुरू होगा NSE IPO

NSE का IPO आम निवेशकों के लिए 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 16 सितंबर से शुरू होगी।

कंपनी ने IPO के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

कितना है लॉट साइज?

रिटेल निवेशकों के लिए NSE IPO का न्यूनतम लॉट साइज 8 शेयर रखा गया है। ऊपरी प्राइस बैंड यानी ₹1,785 के हिसाब से निवेशकों को कम से कम ₹14,280 लगाने होंगे।

वहीं, NSE के योग्य कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹170 की विशेष छूट दी जा रही है।

₹22,568 करोड़ का है IPO

NSE का यह IPO करीब ₹22,568.94 करोड़ का है और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा।

इसमें मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ से ज्यादा शेयर बेचेंगे। चूंकि यह OFS है, इसलिए शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम NSE के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों और संस्थागत निवेशकों को मिलेगी।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और मॉर्गन स्टेनली समेत कुछ बड़े संस्थागत निवेशकों ने अपने हिस्से से बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या में कुछ कटौती की है।

ग्रे मार्केट में क्या है NSE IPO का GMP?

प्राइस बैंड तय होने के बाद NSE IPO को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ग्रे मार्केट में NSE IPO करीब ₹200 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है।

यह प्रीमियम ऊपरी प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 11 से 12 फीसदी के आसपास बैठता है। हालांकि, ग्रे मार्केट का प्रीमियम अनऑफिशियल होता है और इसमें लगातार बदलाव हो सकता है।

कब होगा अलॉटमेंट और लिस्टिंग?

NSE IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को होने की उम्मीद है। इसके बाद शेयरों की बाजार में लिस्टिंग 24 सितंबर को संभावित है।

इस IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल को लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।

कुल मिलाकर, NSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े और चर्चित IPO में शामिल होने जा रहा है। निवेश करने से पहले निवेशकों को IPO के दस्तावेज, वैल्यूएशन और अपने जोखिम को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।