☰
×

डॉलर के मुकाबले लगातार मजबूत हो रहा रुपया! क्या थम जाएगी ग्रीनबैक की रफ्तार? जानिए ट्रेडर्स के लिए क्या है बड़ा संकेत

 

भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की। मंगलवार को रुपया 50 पैसे की बढ़त के साथ 95.28 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.78 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में रुपये में कुल 1.50 रुपये की मजबूती आई है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। इसके अलावा, डॉलर में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू शेयर बाजार में आई तेजी ने भी रुपये की रिकवरी में मदद की।

RBI के कदमों से रुपये को मिला सहारा

रुपये की गिरावट पर अंकुश लगाने के लिए RBI ने हाल ही में कई नियामकीय उपायों की घोषणा की। इनका उद्देश्य स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी वाली पोजीशन को सीमित करना है।

इन उपायों में तेल विपणन कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था और कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स कारोबार के नियमों को सख्त करना शामिल है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन कदमों से डॉलर की तत्काल मांग कम हो सकती है और रुपये पर पड़ने वाला दबाव घट सकता है।

कारोबार के दौरान 94.96 के स्तर तक पहुंचा रुपया

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को रुपया 95.53 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 94.96 का उच्च स्तर और 95.53 का निचला स्तर छुआ। आखिर में यह 95.28 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

इससे पहले सोमवार को रुपये में 93 पैसे की तेजी दर्ज की गई थी। यह छह महीने से अधिक समय में एक कारोबारी दिन के दौरान रुपये की सबसे बड़ी बढ़त बताई गई थी।

लगातार तीन सत्रों की तेजी के बाद रुपये ने हाल के निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की चाल के कारण आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

USD/INR के लिए 95 रुपये का स्तर अहम

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, रुपये की मजबूती के पीछे RBI के नियामकीय कदम, डॉलर में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू शेयर बाजार में सुधार जैसे कारक रहे हैं। इसके साथ ही, रुपये के खिलाफ बनाई गई कुछ लॉन्ग पोजीशन के हटने से भी बाजार को सहारा मिला।

तकनीकी नजरिए से स्पॉट USD/INR जोड़ी के लिए 95 रुपये का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि रुपया इस स्तर से नीचे जाता है, तो 94.50 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूती की संभावना बन सकती है। हालांकि, बाहरी आर्थिक दबावों के चलते रुपये की आगे की तेजी सीमित भी रह सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये पर क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल के दौरान रुपये के मूल्य में काफी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि RBI घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए प्रयास जारी रखेगा।

वित्त मंत्री के मुताबिक, रुपये पर दबाव की प्रमुख वजहें बाहरी चुनौतियां हैं। सरकार का ध्यान देश के घरेलू मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स को मजबूत बनाए रखने पर है, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की स्थिति स्थिर बनी रहे।

रुपये को संभालने के लिए RBI ने किए ये बदलाव

रुपये में गिरावट को नियंत्रित करने के उद्देश्य से RBI ने तेल विपणन कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था की घोषणा की है। इसके जरिए इन कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है, जिससे स्पॉट बाजार में सीधे डॉलर खरीदने की मांग कम होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े कुछ नियमों को सख्त किया गया है, ताकि रुपये के खिलाफ अत्यधिक सट्टेबाजी वाली पोजीशन पर रोक लगाई जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों को 20 लाख डॉलर यानी 2 मिलियन डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का रिजर्व बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इन उपायों का असर आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार की चाल और रुपये की स्थिरता पर दिखाई दे सकता है।

डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल में नरमी

मंगलवार को छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.26 प्रतिशत गिरकर 102.32 पर कारोबार कर रहा था। डॉलर में कमजोरी आने से रुपये जैसी अन्य मुद्राओं को समर्थन मिल सकता है।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.93 प्रतिशत गिरकर 104.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर की मांग और आयात बिल पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर तेल की कीमतों और आयात की मात्रा पर निर्भर करेगा।

शेयर बाजार में भी जोरदार तेजी

मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109.10 अंक चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 358.60 अंक की बढ़त के साथ 22,721.95 पर पहुंच गया।

हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को शुद्ध आधार पर 1,708.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

आगे रुपये की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

रुपये की आगे की दिशा कई कारकों से तय होगी। इनमें RBI के नए उपायों का असर, डॉलर इंडेक्स की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।फिलहाल लगातार तीन कारोबारी सत्रों की मजबूती ने रुपये को राहत दी है। लेकिन इसे स्थायी रिकवरी मानना जल्दबाजी होगी। निवेशकों और कारोबारियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के आसपास टिक पाता है या नहीं और आने वाले सत्रों में विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कितना कम होता है।