अमीर बनने का असली फॉर्मूला: ₹2,500 कमाने वाले ने कैसे बनाए ₹6 करोड़? यह 7 गलतियां आप कभी मत करना
जब भी करोड़ों की संपत्ति वाले किसी व्यक्ति की बात होती है, तो अक्सर लगता है कि उसकी सैलरी बहुत ज्यादा रही होगी या फिर उसे परिवार से बड़ी विरासत मिली होगी। लेकिन अहमदाबाद के 51 वर्षीय ग्रिजेश अगल की कहानी इन दोनों धारणाओं से बिल्कुल अलग है।
ग्रिजेश ने साल 1998 में उदयपुर से महज ₹2,500 महीने की सैलरी पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। आज उनके पास म्यूचुअल फंड, शेयर, रियल एस्टेट और गोल्ड समेत ₹6 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है।
हालांकि, इस सफर में उन्हें बाजार की बड़ी गिरावट का सामना भी करना पड़ा। 2008 के मार्केट क्रैश में उनका पोर्टफोलियो करीब 70 फीसदी तक गिर गया और उन्होंने अपनी SIP रोक दी थी। लेकिन 2020 में कोविड संकट के दौरान जब उनका पोर्टफोलियो करीब ₹90 लाख से गिरकर ₹65 लाख तक पहुंच गया, तब उन्होंने घबराकर निवेश बंद नहीं किया।
समय के साथ उनकी सोच और निवेश का तरीका बदला। उनकी ₹7,000 की शुरुआती SIP बढ़कर ₹57,000 प्रति महीने तक पहुंच गई। उनकी कहानी बताती है कि बड़ी दौलत बनाने के लिए सिर्फ ज्यादा कमाई जरूरी नहीं, बल्कि सही समय पर बचत, निवेश और अनुशासन भी बेहद जरूरी है।
आइए जानते हैं ग्रिजेश के सफर से मिलने वाले 7 बड़े फाइनेंशियल सबक।
1. सबसे बड़ा निवेश आपका करियर है
ग्रिजेश राजस्थान के सलूंबर में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। बी.फार्मा और एमबीए की पढ़ाई के बाद उन्होंने फार्मा सेल्स में नौकरी शुरू की।
साल 2004 में अहमदाबाद आने के बाद उन्हें बिजनेस और इक्विटी मार्केट को समझने का मौका मिला। इसके बाद 2009 में एरिस लाइफसाइंसेज जॉइन करने पर उनका सालाना पैकेज करीब ₹6 लाख था, जो आगे चलकर ₹9 लाख, ₹15 लाख और फिर ₹21 लाख तक पहुंच गया।
यानी उनकी संपत्ति सिर्फ इसलिए नहीं बनी क्योंकि उन्होंने शुरुआत से बड़ी सैलरी कमाई। उनकी कमाई बढ़ती गई और उन्होंने बढ़ी हुई आय का एक हिस्सा लगातार निवेश में लगाना जारी रखा।
2. जल्दी निवेश शुरू करें, लेकिन ऐसा प्लान बनाएं जिसे लंबे समय तक जारी रख सकें
साल 2006 में जब उनकी सैलरी करीब ₹15,000 थी, तब उन्होंने ₹20,000 का लंपसम निवेश किया और हर महीने ₹7,000 की SIP शुरू की।
यह उनकी आय का बड़ा हिस्सा था। लेकिन उस समय उनके ऊपर होम लोन, कार लोन और परिवार की जिम्मेदारियां भी थीं।
फिर आया 2008 का मार्केट क्रैश। पोर्टफोलियो में करीब 70 फीसदी की गिरावट ने उन पर दबाव बढ़ाया और उन्हें SIP रोकनी पड़ी।
इससे एक बड़ी सीख मिलती है—निवेश जल्दी शुरू करना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि आपके पास ऐसा फाइनेंशियल बैकअप हो, जिससे बाजार गिरने पर आपको निवेश बेचने या बंद करने की जरूरत न पड़े।
3. कर्ज खत्म करें और बची EMI को निवेश में लगाएं
ग्रिजेश ने अपने होम लोन को जल्दी खत्म करने पर ध्यान दिया। अक्टूबर 2010 में उन्होंने अपना पहला होम लोन चुका दिया और दिसंबर 2011 में फिर से ₹7,000 की SIP शुरू कर दी।
इसके बाद 2020 में कोविड के दौरान उन्होंने करीब ₹20 लाख का दूसरा होम लोन भी चुका दिया।
इसके बाद EMI में जाने वाला पैसा उन्होंने SIP बढ़ाने में इस्तेमाल किया। यानी उन्होंने सिर्फ कर्ज खत्म नहीं किया, बल्कि कर्ज खत्म होने के बाद बचने वाले कैश फ्लो को वेल्थ क्रिएशन में लगा दिया।
4. सैलरी बढ़े तो SIP भी बढ़नी चाहिए
ग्रिजेश की SIP एक जगह स्थिर नहीं रही। जैसे-जैसे उनकी कमाई बढ़ी, उन्होंने निवेश की रकम भी बढ़ाई।
₹7,000 की SIP बढ़कर पहले ₹15,000, फिर ₹30,000, ₹50,000 और आखिरकार ₹57,000 प्रति महीना तक पहुंच गई।
2016 में जब उनका CTC करीब ₹15 लाख हुआ, तब उन्होंने सेविंग्स अकाउंट में पड़े करीब ₹25 लाख के अतिरिक्त पैसे को भी निवेश कर दिया।
उनका फॉर्मूला काफी सीधा था—कमाई बढ़ाओ, बचत बढ़ाओ, SIP बढ़ाओ और निवेश को समय दो।
5. जरूरत से ज्यादा पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में न पड़ा रहने दें
2016 में उनके सेविंग्स अकाउंट में करीब ₹25 लाख का सरप्लस पैसा पड़ा हुआ था। पोर्टफोलियो रिव्यू के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि यह पैसा लंबे समय तक बिना किसी खास उद्देश्य के बैंक में पड़ा है।
इसके बाद इमरजेंसी फंड को अलग रखते हुए उन्होंने इस रकम को भी निवेश में लगाया।
इससे सीख मिलती है कि जरूरी खर्च और इमरजेंसी फंड के लिए पैसा अलग रखने के बाद अगर बड़ी रकम बिना उद्देश्य के पड़ी है, तो उसके बेहतर इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है।
6. मार्केट क्रैश असल में आपके निवेश से ज्यादा आपके धैर्य का टेस्ट होता है
2008 में भारी गिरावट के दौरान SIP रोकना ग्रिजेश के लिए एक सीख साबित हुआ।
लेकिन 2020 में उन्होंने वही गलती दोबारा नहीं दोहराई। कोविड संकट के दौरान उनका पोर्टफोलियो करीब ₹90 लाख से घटकर ₹65 लाख रह गया, लेकिन इस बार उन्होंने घबराकर निवेश बंद नहीं किया।
2011 के बाद से उन्होंने म्यूचुअल फंड से पैसा नहीं निकाला। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने का फायदा उन्हें मिला और आज उनका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो करीब ₹2.78 करोड़ का बताया गया है, जबकि कुल निवेश करीब ₹1.34 करोड़ रहा।
7. हर फैसला सही होना जरूरी नहीं, लेकिन सीखते रहना जरूरी है
ग्रिजेश के सफर में गलतियां भी हुईं। 2008 में SIP रोकना उनके लिए एक गलत फैसला साबित हुआ। वहीं होम लोन जल्दी चुकाने की रणनीति के कारण वे कंपनी के ESOPs के एक मौके से भी चूक गए, जिसकी आज अनुमानित वैल्यू करीब ₹1.40 करोड़ हो सकती थी।
इसके बावजूद उन्होंने निवेश का सफर जारी रखा।
आज उनके पास 3 फ्लैट, 1 प्लॉट, 200 ग्राम सोना, करीब ₹2.78 करोड़ के म्यूचुअल फंड, ₹37.9 लाख के शेयर और FD/PPF जैसे अन्य निवेश भी हैं।
साल 2021 में उन्होंने अपनी फार्मा कंपनी शुरू की और अब उनका लक्ष्य 58 साल की उम्र तक करीब ₹7.5 करोड़ से ₹10 करोड़ का कॉर्पस तैयार करना है।
क्या है स्टेप-अप SIP?
स्टेप-अप SIP यानी ऐसी SIP जिसमें निवेशक एक तय अंतराल पर अपनी मासिक निवेश राशि बढ़ाता जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10,000 की SIP कर रहे हैं तो हर साल इसे 10 फीसदी बढ़ाया जा सकता है।
सैलरी और आय बढ़ने के साथ SIP बढ़ाने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा बढ़ सकता है।
ग्रिजेश की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि करोड़ों की संपत्ति बनाने के लिए शुरुआत में करोड़ों की कमाई जरूरी नहीं होती। छोटी शुरुआत, लगातार निवेश, बढ़ती SIP, कर्ज पर नियंत्रण और लंबे समय तक धैर्य—ये चीजें मिलकर बड़ा फंड तैयार कर सकती हैं।