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IDBI बैंक को खरीदने वाली कंपनी के नाम पर लगी मुहर! ₹52,877 करोड़ में फेयरफैक्स खरीदेगी 60.72% हिस्सेदारी

 

IDBI Bank Disinvestment: IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दी गई जानकारी के मुताबिक, 14 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट ने बैंक की हिस्सेदारी बेचने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सौदे के तहत केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स (Fairfax) को बेचेंगे। इस डील की कुल कीमत ₹52,877 करोड़ बताई गई है।

इस सौदे के बाद फेयरफैक्स IDBI बैंक की नई प्रमोटर बन जाएगी। वहीं, केंद्र सरकार और LIC के पास भी बैंक की हिस्सेदारी बनी रहेगी। वर्ष 2022 में टाटा समूह को एयर इंडिया बेचे जाने के बाद इसे सरकार के बड़े विनिवेश सौदों में से एक बताया जा रहा है।

सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी बचेगी?

इस सौदे में केंद्र सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी फेयरफैक्स को हस्तांतरित करेगी। सौदा पूरा होने के बाद दोनों की हिस्सेदारी घट जाएगी।

दी गई जानकारी के अनुसार, डील के बाद IDBI बैंक में शेयरहोल्डिंग इस प्रकार होगी:

शेयरहोल्डर मौजूदा हिस्सेदारी डील के बाद हिस्सेदारी
फेयरफैक्स 0% 60.72%
LIC 49.24% 19%
केंद्र सरकार 45.48% 15%
पब्लिक और अन्य 5.28% 5.28%

इस तरह फेयरफैक्स के पास बैंक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी आ जाएगी। हालांकि, सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 34% रह जाएगी।

₹75.99 के मुकाबले ₹81 प्रति शेयर की बोली

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ने शेयर का आधार मूल्य तय करने की प्रक्रिया अपनाई थी। दी गई जानकारी के मुताबिक, दो स्वतंत्र एजेंसियों ने बैंक के एक शेयर की कीमत ₹75.99 आंकी थी।

इसके मुकाबले फेयरफैक्स ने ₹81 प्रति शेयर की बोली लगाई। यानी कंपनी की बोली निर्धारित आधार मूल्य से ₹5.01 प्रति शेयर ज्यादा थी। इसी वजह से फेयरफैक्स की पेशकश को स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई है।

यह सौदा बैंक के स्वामित्व में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, अंतिम हस्तांतरण और सौदे की अन्य शर्तें संबंधित नियामकीय मंजूरियों तथा आधिकारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगी।

2022 में शुरू हुई थी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया

IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया की शुरुआत 7 अक्टूबर 2022 को हुई थी। उस समय सरकार ने बैंक को खरीदने में रुचि रखने वाली कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किए थे।

शुरुआती चरण में पांच कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। दस्तावेजों और पात्रता की जांच के बाद चार कंपनियां योग्य पाई गईं। इसके बाद अंतिम चरण में दो कंपनियों ने तकनीकी दस्तावेज और वित्तीय बोलियां जमा कीं।

दी गई जानकारी के अनुसार, फेयरफैक्स ने सबसे बेहतर बोली लगाकर सौदे में बढ़त हासिल की।

IDBI बैंक के ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

बैंक की हिस्सेदारी बेचने की खबर के बाद ग्राहकों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या उनकी जमा राशि, खाते, लोन या बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ेगा।

सिर्फ हिस्सेदारी बेचने के फैसले से ग्राहकों के खातों या जमा राशि की शर्तें अपने आप नहीं बदल जातीं। बैंकिंग सेवाओं में किसी भी बदलाव की जानकारी संबंधित बैंक की ओर से आधिकारिक रूप से दी जाती है। इसलिए ग्राहकों को फिलहाल बैंक के आधिकारिक अपडेट पर ध्यान देना चाहिए।