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टाटा संस का बड़ा फैसला: एन चंद्रशेखरन बने रहेंगे चेयरमैन, बोर्ड ने 5 साल के दूसरे एक्सटेंशन को दी मंजूरी

 

टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर एक और 5 साल का कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। बोर्ड ने गुरुवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।हालांकि, ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले कुछ टाटा ट्रस्ट्स चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दे सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस फैसले को लेकर टाटा समूह के भीतर चर्चा तेज हो सकती है।

9 साल में टाटा ग्रुप का कारोबार कितना बढ़ा?

एन चंद्रशेखरन ने वर्ष 2017 में टाटा ग्रुप की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान समूह ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया। इनमें एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान ग्रुप के कारोबार और मुनाफे में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू करीब ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ हो गया।

  • मुनाफा: इसी अवधि में ग्रुप का मुनाफा करीब ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया।

  • मार्केट कैप: टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 2020 में करीब ₹9.31 लाख करोड़ था, जो 2026 में बढ़कर ₹24.39 लाख करोड़ हो गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में क्या अंतर है?

टाटा समूह से जुड़ी तीन प्रमुख संस्थाओं को समझना जरूरी है।

टाटा ग्रुप: टाटा नाम के तहत काम करने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का व्यापक समूह टाटा ग्रुप कहलाता है। इसमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं।

टाटा संस: यह टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और ग्रुप के बड़े रणनीतिक फैसलों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

टाटा ट्रस्ट्स: टाटा ट्रस्ट्स कई परोपकारी और सामाजिक संस्थाओं का समूह है। इनके पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है।

अब आगे क्या?

एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने के लिए बोर्ड की मंजूरी के बाद यह मामला अब टाटा संस के स्वामित्व ढांचे और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका के कारण चर्चा में है। ईटी की रिपोर्ट में कुछ ट्रस्ट्स की ओर से उनकी पुनर्नियुक्ति को चुनौती दिए जाने की संभावना जताई गई है।