पेट्रोल पंप के नोजल पर एथेनॉल की मात्रा लिखने की मांग खारिज, वीडियो में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सक्षम अथॉरिटी के पास जाएं
पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को डिस्पेंसिंग नोजल पर स्पष्ट रूप से लिखने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित सक्षम अथॉरिटी के सामने अपनी मांग रखने की छूट दी है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने से पहले याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग या हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।
हर नोजल पर E20 जैसी लेबलिंग की थी मांग
एडवोकेट नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि देशभर के पेट्रोल पंपों की हर डिस्पेंसिंग नोजल पर अनिवार्य और एकसमान लेबलिंग की व्यवस्था की जाए।याचिका में कहा गया था कि पेट्रोल पंप पर उपभोक्ता को यह स्पष्ट रूप से पता चलना चाहिए कि वह जिस पेट्रोल को खरीद रहा है, उसमें कितने प्रतिशत एथेनॉल मिला हुआ है। इसके लिए नोजल पर E20 जैसे स्पष्ट संकेत लिखे जाने की मांग की गई थी। इससे वाहन चालकों को ईंधन की संरचना के बारे में सीधे जानकारी मिल सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने संकेत दिया कि पहले संबंधित विभाग, सक्षम प्राधिकरण या हाई कोर्ट के समक्ष इस मुद्दे को उठाया जा सकता था।पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिका खारिज की जाती है और याचिकाकर्ता के लिए सक्षम अथॉरिटी के पास जाने का विकल्प खुला है। यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला देकर एथेनॉल लेबलिंग की मांग को गलत नहीं ठहराया है, बल्कि याचिकाकर्ता को उचित प्रशासनिक या न्यायिक मंच पर जाने की स्वतंत्रता दी है।
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति क्या है?
भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, देश में उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। इसी नीति के तहत देश में E20 पेट्रोल, यानी करीब 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, को बढ़ावा दिया जा रहा है।हालांकि, अलग-अलग वाहनों की तकनीकी क्षमता और ईंधन के साथ उनकी अनुकूलता को लेकर वाहन मालिकों के बीच सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता का तर्क था कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल खरीदते समय उसमें मौजूद एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए जानकारी का मुद्दा
याचिका में नोजल पर लेबलिंग को अनिवार्य और एकसमान बनाने की मांग की गई थी, ताकि देशभर में पेट्रोल खरीदने वाले ग्राहकों को ईंधन की संरचना के बारे में समान तरीके से जानकारी मिल सके।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए याचिकाकर्ता संबंधित सक्षम अथॉरिटी के पास जा सकते हैं। यदि वहां से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत आगे कदम उठाया जा सकता है।इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को 31 अगस्त 2026 को खारिज किया है, लेकिन सक्षम प्राधिकरण के समक्ष मुद्दा उठाने का रास्ता खुला रखा है।