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Stock Market Update: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,600 के नीचे; निवेशकों के ₹5 लाख करोड़ स्वाहा

 

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। बाजार में गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब ₹5 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

गुरुवार सुबह कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूटकर 73,100 के स्तर से नीचे पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के स्तर से नीचे फिसल गया।सुबह करीब 9:50 बजे सेंसेक्स 73,343.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 गिरकर 22,647.90 पर आ गया था। इस दौरान निफ्टी में लगभग 0.73 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

शेयर बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रहीं। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर लगभग 110.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमलों से जुड़ी खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से पेंट, टायर और तेल विपणन कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। 

बैंकिंग और बड़े शेयरों में बिकवाली

कारोबार के दौरान कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक के शेयर करीब 1.6 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग 1 प्रतिशत नीचे आए। बाजार में व्यापक बिकवाली के कारण अधिकांश प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। रिपोर्ट के अनुसार, 16 प्रमुख सेक्टरों में से 15 में गिरावट दर्ज की गई।इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी लगभग 1.2 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि दबाव केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं था, बल्कि बाजार के व्यापक हिस्से में बिकवाली हावी रही। 

निवेशकों की नजर अब किन बातों पर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के रुख, महंगाई और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव और कंपनी-विशेष से जुड़ी खबरों पर ध्यान देना जरूरी है। केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला लेने से बचना चाहिए।