Stock Market : सेंसेक्स में 150 अंकों की तेजी के साथ 73,300 पर कारोबार, निफ्टी भी चढ़ा; मेटल और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई, लेकिन निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी से बाजार ने शानदार वापसी की। सुबह कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 500 अंकों से ज्यादा टूट गया था, जबकि निफ्टी भी 22,400 के स्तर के करीब पहुंच गया था। इसके बाद मेटल, फार्मा और कुछ बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांकों में रिकवरी देखने को मिली।सुबह करीब 10:20 बजे सेंसेक्स लगभग 73,341 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 करीब 22,655 पर पहुंच गया था। उस समय सेंसेक्स करीब 217 अंक की बढ़त में था। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था और कारोबार के दौरान कीमतों में बदलाव जारी था।
सेंसेक्स और निफ्टी में क्यों आई तेजी?
बाजार में आई रिकवरी के पीछे निचले स्तरों पर खरीदारी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। लगातार चार कारोबारी सत्रों की कमजोरी के बाद कुछ निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की। इससे बाजार को सहारा मिला और शुरुआती गिरावट का बड़ा हिस्सा रिकवर हो गया।हालांकि, बाजार की तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर सतर्कता बनी हुई है। इन घटनाक्रमों का असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
मेटल और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
सोमवार को बाजार की रिकवरी में मेटल और फार्मा सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 1.3% और निफ्टी फार्मा इंडेक्स लगभग 1.1% ऊपर था।प्रमुख शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और टाटा स्टील में मजबूती देखने को मिली। वहीं, आईटी सेक्टर के कुछ शेयर दबाव में रहे। इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे शेयरों में कमजोरी के कारण आईटी इंडेक्स की तेजी सीमित रही।
किन वजहों से बाजार पर बना हुआ है दबाव?
शेयर बाजार में तेजी लौटने के बावजूद कुछ अहम जोखिम निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
2. पश्चिम एशिया में तनाव: क्षेत्र में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इससे निवेशकों का रुख सतर्क रह सकता है।
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक: 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली फेड की मौद्रिक नीति बैठक पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है। ब्याज दरों और भविष्य की नीति को लेकर मिलने वाले संकेतों से विदेशी निवेश और शेयर बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है।
4. कंपनियों के तिमाही नतीजे: निवेशक कंपनियों के वित्तीय नतीजों, मुनाफे और भविष्य के कारोबारी अनुमान पर भी नजर रख रहे हैं। अच्छे नतीजे वाले शेयरों में खरीदारी और कमजोर नतीजों वाले शेयरों में बिकवाली देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत हैं?
फिलहाल बाजार में शुरुआती गिरावट के बाद आई रिकवरी राहत जरूर दे रही है, लेकिन इसे पूरी तरह मजबूत तेजी की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। बाजार की अगली दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगी।निवेशकों को केवल सेंसेक्स और निफ्टी की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। खासकर इंट्राडे ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव के दौरान स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।