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Stock Market Crash: सेंसेक्स 500 अंक फिसला, निफ्टी 200 पॉइंट टूटा; ऑटो-मेटल शेयरों में भारी बिकवाली

 

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 15 सितंबर को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा फिसलकर 74,200 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी में भी करीब 200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,200 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में ऑटो, मेटल, फार्मा और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

भारतीय बाजार के साथ एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 0.85% गिरा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1% से ज्यादा नीचे रहा। जापान के निक्केई में हालांकि मामूली गिरावट दर्ज की गई।

इंडेक्स लेवल गिरावट प्रतिशत
कोस्पी 6,627 -57 -0.85%
निक्केई 63,484 -9 -0.01%
हैंगसेंग 24,671 -246 -1.03%

अमेरिकी बाजार भी लाल निशान में बंद

इससे पहले सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिली थी। डाउ जोन्स 152 अंक यानी 0.29% की गिरावट के साथ बंद हुआ। नैस्डैक में 147 अंक और S&P 500 में 37 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

इंडेक्स लेवल गिरावट प्रतिशत
डाउ जोन्स 52,421 -152 -0.29%
नैस्डैक 26,186 -147 -0.56%
S&P 500 7,620 -37 -0.48%

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता बढ़ा रही है। पिछले 7 दिनों में FII/FPI ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 1,952 करोड़ रुपये की निकासी की है। वहीं पिछले 30 दिनों में विदेशी निवेशकों की नेट बिकवाली करीब 11,069 करोड़ रुपये रही।

इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने खरीदारी जारी रखी है। पिछले 7 दिनों में DII की नेट खरीदारी करीब 4,503 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले 30 दिनों में उन्होंने करीब 66,202 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।

कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन
DII 1,968 करोड़ 4,503 करोड़ 66,202 करोड़
FII/FPI -931 करोड़ -1,952 करोड़ -11,069 करोड़

शुक्रवार को भी बाजार में रही थी गिरावट

इससे पहले शुक्रवार को भी भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 121 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था। अब मंगलवार के कारोबार में भी शुरुआती कमजोरी से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है।

बाजार में आज खासतौर पर बैंकिंग, ऑटो, मेटल और फार्मा शेयरों पर नजर बनी हुई है। निवेशक वैश्विक बाजारों के रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर आगे की दिशा तय कर सकते हैं।