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Stock Market Crash: 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, लगातार 8वें हफ्ते टूटा Sensex-Nifty; ये 5 वजहें
 

 

भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर की शुरुआत भी दबाव के साथ हुई। Sensex और Nifty लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जो करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला है। 1 अक्टूबर को भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का दबाव रहा।

Sensex 570 अंक और Nifty करीब 200 अंक फिसला
गुरुवार के कारोबार में Sensex 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों में गिरावट इससे कहीं ज्यादा थी और बाद में बाजार ने निचले स्तरों से कुछ रिकवरी की।
पूरे सप्ताह में Nifty करीब 3.1 फीसदी और Sensex करीब 2.7 फीसदी नीचे रहा। आठ सप्ताह की लगातार गिरावट में Nifty लगभग 8.7 फीसदी और Sensex करीब 8.4 फीसदी टूट चुका है।
2001 के बाद पहली बार इतना लंबा डाउनट्रेंड
बाजार की मौजूदा कमजोरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Nifty और Sensex लगातार आठ सप्ताह से लाल निशान में हैं। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Nifty का यह सिलसिला 2001 के बाद सबसे लंबा है। यानी बाजार में दबाव केवल एक-दो कारोबारी सत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि करीब दो महीने से जारी है।
बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. Foreign Investors की लगातार बिकवाली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है। 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 10,148 करोड़ रुपये की बिकवाली की। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से घरेलू बाजार में सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।
2. 100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
Brent crude की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है।
3. US Bond Yield में तेज उछाल
अमेरिका की 10 साल की Treasury yield करीब 5.34 फीसदी तक पहुंच गई, जो 2002 के बाद का ऊंचा स्तर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश के आकर्षण पर दबाव पड़ सकता है और विदेशी पूंजी की दिशा प्रभावित हो सकती है।
4. रुपये में कमजोरी
महंगा कच्चा तेल और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। 1 अक्टूबर को रुपया करीब 96.32 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ, जो लगभग दो महीने का निचला स्तर था।
5. Auto और दूसरे सेक्टरों में बिकवाली
गुरुवार को ऑटो, मेटल, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी समेत कई सेक्टरों में कमजोरी रही। Bajaj Auto और Mahindra & Mahindra जैसे शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर IT शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
IT शेयरों ने संभाला बाजार
बाजार की व्यापक गिरावट के बीच Nifty IT सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख सेक्टरों में रहा। 1 अक्टूबर को Nifty IT में करीब 2.2 फीसदी की तेजी आई। Infosys और TCS समेत कई IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
इस तरह भारतीय बाजार में फिलहाल विदेशी बिकवाली, महंगे तेल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी जैसे कई दबाव एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वहीं IT सेक्टर ने गुरुवार के कारोबार में व्यापक बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की।