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स्टॉक मार्केट क्लोजिंग: सेंसेक्स 71,925 और निफ्टी 157 अंक नीचे; जानिए किन सेक्टर्स ने बढ़ाया बाजार पर दबाव

 

भारतीय शेयर बाजार में 12 अक्टूबर को गिरावट देखने को मिली। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 548 अंक गिरकर 71,925 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,363 पर आ गया। बाजार में आई इस कमजोरी के बीच IT, बैंकिंग और FMCG सेक्टर के शेयरों में ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।बाजार में गिरावट के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों को लेकर चिंता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

बाजार गिरने के 4 बड़े कारण

1. RBI के रुख से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की आशंका से बाजार पर दबाव बना हुआ है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है और कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे और शेयरों की कीमतों पर पड़ सकता है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी शेयर बाजारों पर दबाव पड़ सकता है। जब सुरक्षित माने जाने वाले बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलने लगता है, तो कुछ निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं। इससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है।

3. कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों पर हमलों की घटनाओं से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 2% बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की खबर है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। साथ ही महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।

4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII/FPI की बिकवाली भी बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब ₹25,595 करोड़ के शेयर बेचे हैं।

हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने इस दौरान खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार की तेजी पर दबाव बना हुआ है।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार

12 अक्टूबर को एशियाई बाजारों में अलग-अलग रुख देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.65% गिरा, जबकि जापान का निक्केई मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, हांगकांग का हैंगसेंग 0.25% चढ़ा।

एशियाई इंडेक्स स्तर बदलाव
कोस्पी 6,384 -3.65%
निक्केई 69,031 -0.02%
हैंगसेंग 24,271 +0.25%

अमेरिकी बाजार में पिछले सत्र में रही तेजी

9 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स 423 अंक, नैस्डैक 173 अंक और S&P 500 में 46 अंकों की बढ़त रही थी। इसके बावजूद 12 अक्टूबर को भारतीय बाजार में गिरावट देखने को मिली।

अमेरिकी इंडेक्स स्तर बदलाव
डाउ जोन्स 51,655 +0.83%
नैस्डैक 27,366 +0.64%
S&P 500 7,812 +0.59%

FII की बिकवाली के मुकाबले DII की खरीदारी

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने ₹25,595 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹25,132 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।

निवेशक श्रेणी आज के आंकड़े पिछले 7 दिन पिछले 30 दिन
DII +₹4,743 करोड़ +₹25,132 करोड़ +₹91,399 करोड़
FII/FPI -₹3,569 करोड़ -₹25,595 करोड़ -₹84,370 करोड़

 पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में आई थी तेजी

इससे पहले 9 अक्टूबर को शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 879 अंक यानी 1.23% चढ़कर 72,472 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी में 289 अंकों की बढ़त दर्ज की गई थी और यह 22,520 के स्तर पर बंद हुआ था।

लेकिन 12 अक्टूबर को बाजार की दिशा बदल गई और प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए।

 निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

ब्याज दरों को लेकर चिंता, कच्चे तेल की महंगाई, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारक बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपनी निवेश अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और कंपनियों के फंडामेंटल पर ध्यान देना चाहिए।