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SIP vs NPS: हर महीने ₹5,000 निवेश से 30 साल में कितना बनेगा फंड? जानें किसमें ज्यादा फायदा
 

 

रिटायरमेंट के लिए कम उम्र से निवेश शुरू करना भविष्य की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति 30 साल की उम्र में हर महीने ₹5,000 निवेश करना शुरू करता है और इसे अगले 30 साल तक जारी रखता है, तो 60 साल की उम्र तक एक बड़ा कॉर्पस तैयार हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि इस रकम को SIP में लगाया जाए या NPS में?
इसे समझने के लिए अगर SIP पर औसतन 12% और NPS पर 10% सालाना रिटर्न मानें, तो दोनों विकल्पों के बीच काफी बड़ा अंतर दिखाई देता है।


30 साल में जमा होंगे ₹18 लाख
हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर एक साल में ₹60,000 और 30 साल में कुल ₹18 लाख निवेश होंगे। बाकी रकम कंपाउंडिंग के जरिए बनने वाले रिटर्न से तैयार होगी।
12% औसत सालाना रिटर्न के अनुमान पर SIP का कॉर्पस करीब ₹1.76 करोड़ तक पहुंच सकता है। वहीं 10% औसत रिटर्न मानने पर NPS में करीब ₹1.14 करोड़ का फंड बन सकता है।
इस हिसाब से दोनों के अनुमानित कॉर्पस में करीब ₹62 लाख का अंतर दिखाई देता है।
पैमाना    SIP    NPS
मासिक निवेश    ₹5,000    ₹5,000
निवेश अवधि    30 साल    30 साल
कुल निवेश    ₹18 लाख    ₹18 लाख
अनुमानित औसत रिटर्न    12%    10%
अनुमानित कॉर्पस    ₹1.76 करोड़    ₹1.14 करोड़
अनुमानित रिटर्न    ₹1.58 करोड़    ₹96 लाख
सिर्फ 2% का अंतर कैसे बन गया ₹62 लाख?
SIP और NPS के उदाहरण में औसत रिटर्न का अंतर केवल 2 प्रतिशत है। लेकिन निवेश की अवधि 30 साल होने के कारण कंपाउंडिंग इस छोटे अंतर को काफी बड़ा बना देती है।
SIP में 12% औसत रिटर्न मानने पर ₹18 लाख के कुल निवेश से अनुमानित कॉर्पस करीब ₹1.76 करोड़ हो सकता है। यानी करीब ₹1.58 करोड़ की रकम अनुमानित रिटर्न से जुड़ती है।
हालांकि, यह केवल एक गणितीय उदाहरण है। इक्विटी म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और 12% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।


NPS में भी लंबी अवधि का फायदा
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम मुख्य रूप से रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि में फंड तैयार करने का विकल्प है। यदि यहां औसतन 10% सालाना रिटर्न मानें, तो ₹5,000 का मासिक निवेश 30 साल बाद करीब ₹1.14 करोड़ का कॉर्पस बना सकता है।
इसमें ₹18 लाख आपका कुल निवेश होगा, जबकि लगभग ₹96 लाख अनुमानित रिटर्न से जुड़ेंगे। हालांकि NPS का वास्तविक रिटर्न भी बाजार और निवेश विकल्पों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
असली अंतर रिटायरमेंट के समय सामने आता है
SIP और NPS में सिर्फ रिटर्न का अंतर नहीं है, बल्कि दोनों के नियम और इस्तेमाल का तरीका भी अलग है। NPS को खास तौर पर रिटायरमेंट प्लानिंग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सामान्य एग्जिट के समय गैर-सरकारी सब्सक्राइबर के लिए मौजूदा नियमों के अनुसार कॉर्पस के एक हिस्से को एकमुश्त निकालने और कम से कम 20% हिस्से से एन्युयटी लेने का प्रावधान है। छोटे कॉर्पस के लिए अलग नियम हो सकते हैं।
एन्युीटी के जरिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय हासिल की जा सकती है, लेकिन मिलने वाली रकम एन्युीटी रेट और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।


SIP में ज्यादा लचीलापन
SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर निवेशक को अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन मिलता है। स्कीम के लागू नियमों के अनुसार जरूरत पड़ने पर यूनिट्स को रिडीम किया जा सकता है।
इस वजह से SIP का इस्तेमाल सिर्फ रिटायरमेंट के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने या अन्य लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए भी किया जा सकता है।
Tax के मामले में दोनों अलग
SIP और NPS का टैक्स ट्रीटमेंट एक जैसा नहीं है। SIP में टैक्स देनदारी म्यूचुअल फंड के प्रकार, निवेश की अवधि और कैपिटल गेन के लागू नियमों पर निर्भर करती है।
NPS में भी एकमुश्त निकासी और एन्युिटी से मिलने वाली आय पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं। इसलिए सिर्फ अंतिम कॉर्पस देखकर किसी एक विकल्प को बेहतर मान लेना सही नहीं होगा।
किस निवेशक के लिए कौन सा विकल्प?
अगर आपका लक्ष्य ज्यादा लचीलापन बनाए रखना है और जरूरत के हिसाब से निवेश को इस्तेमाल करने की सुविधा चाहिए, तो SIP एक विकल्प हो सकता है। दूसरी ओर, अगर मुख्य उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए अनुशासित तरीके से लंबी अवधि का फंड बनाना है, तो NPS का ढांचा उपयोगी हो सकता है।
इस उदाहरण में समान ₹5,000 मासिक निवेश और अलग-अलग अनुमानित रिटर्न के आधार पर SIP का कॉर्पस करीब ₹1.76 करोड़ और NPS का करीब ₹1.14 करोड़ बनता है। लेकिन वास्तविक निवेश का फैसला करते समय जोखिम, रिटर्न, टैक्स, लिक्विडिटी और एग्जिट नियमों को साथ में देखना जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश, टैक्स, लोन, बीमा या अन्य वित्तीय निर्णय से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं और पिछले या अनुमानित रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते।