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ग्लोबल मार्केट में गिरावट के बीच सेंसेक्स की उड़ान: 8 महीने बाद 80 हजार के पार पहुंचा बाजार, 7 दिन में 8% से ज्यादा का उछाल

 

दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिल रही है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सेंसेक्स करीब 900 अंक यानी 1.12% की बढ़त के साथ 80,000 के स्तर को पार कर गया। वहीं, निफ्टी में भी लगभग 200 अंकों यानी 0.90% की तेजी दर्ज की गई और यह 24,750 के आसपास कारोबार करता नजर आया।

भारतीय शेयर बाजार के लिए यह तेजी इसलिए भी खास है, क्योंकि सेंसेक्स करीब 8 महीने बाद 80 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंचा है। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 2,009 अंक उछलकर 79,310 पर बंद हुआ था। इस साल सेंसेक्स की इससे बड़ी एकदिनी बढ़त 8 अप्रैल को दर्ज की गई थी, जब इसमें 2,946 अंकों का उछाल आया था।

खास बात यह है कि एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में लगातार सातवें कारोबारी सत्र में तेजी बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

बाजार में तेजी की 2 बड़ी वजहें

भारतीय शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला, विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी और दूसरा, देश की बड़ी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे।

1. विदेशी निवेशकों की जोरदार खरीदारी

पिछले कुछ कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों यानी FII/FPI ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ा निवेश किया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 32,210 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिला है और बड़े शेयरों में खरीदारी बढ़ी है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी के मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की ओर से बिकवाली देखने को मिली है। हालांकि, विदेशी निवेशकों का मजबूत निवेश बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली के आंकड़े (करोड़ रुपये में):

निवेशक श्रेणी लेटेस्ट पिछले 7 दिन पिछले 30 दिन
DII -10,445 -18,228 19,083
FII/FPI 14,975 32,210 10,315

2. बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे

शेयर बाजार में तेजी की दूसरी बड़ी वजह कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे हैं। कई बड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया है।

सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन का असर इंडेक्स पर पड़ता है। जब इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ती है, तो सेंसेक्स को ऊपर जाने में मदद मिलती है। गुरुवार को भी सेंसेक्स की ज्यादातर कंपनियों में तेजी देखने को मिली थी।

भारतीय बाजार में तेजी, लेकिन कोरिया और जापान में भारी गिरावट

जहां भारतीय शेयर बाजार में लगातार खरीदारी हो रही है, वहीं एशिया के कई बड़े बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई करीब 5 से 6% तक टूट गए। हॉन्गकॉन्ग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी गिरावट देखने को मिली।

प्रमुख एशियाई बाजारों का प्रदर्शन:

इंडेक्स स्तर गिरावट (अंक) गिरावट (%)
कोस्पी (दक्षिण कोरिया) 5,119 -246 -5.20%
निक्केई (जापान) 57,434 -3,597 -6.21%
हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24,509 -288 -1.06%

इन आंकड़ों से साफ है कि ग्लोबल बाजारों में दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अलग दिखाई दे रहा है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट

एशियाई बाजारों के साथ अमेरिकी शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 तीनों प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए।

प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स का प्रदर्शन:

इंडेक्स स्तर गिरावट (अंक) गिरावट (%)
डाउ जोन्स 51,523 -1,833 -3.44%
नैस्डैक 24,315 -1,422 -5.52%
S&P 500 7,354 -335 -4.36%

अमेरिकी बाजारों में आई इस गिरावट का असर दुनियाभर के निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में तेजी बने रहना निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

7 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स 8% से ज्यादा चढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला 28 अक्टूबर से जारी है। इस दौरान सेंसेक्स करीब 73,246 के स्तर से बढ़कर 80,000 के पार पहुंच गया। यानी महज 7 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स में 8% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

लगातार खरीदारी के चलते निवेशकों की बाजार में दिलचस्पी बढ़ी है। खासकर बड़े और मजबूत कंपनियों के शेयरों में तेजी ने प्रमुख इंडेक्स को ऊपर पहुंचाने में मदद की है।

एक्सपर्ट बोले- LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद से सुधरा माहौल

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद ने विदेशी निवेशकों का नजरिया बेहतर किया है।

उनका मानना है कि इन वजहों से विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार में लौट रहा है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में तेजी की एक अहम वजह माना है।

हालांकि, LTCG टैक्स में बदलाव की संभावना को फिलहाल उम्मीद के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। जब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे तय फैसला नहीं माना जा सकता।

लार्जकैप शेयरों में आगे भी जारी रह सकती है रिकवरी

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की शुरुआती खरीदारी से लार्जकैप यानी बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती आई है। आने वाले समय में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के बड़े शेयरों में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, लार्जकैप शेयरों में अभी शॉर्ट कवरिंग की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की अगुवाई में बाजार में आगे भी रिकवरी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, उन्होंने निवेशकों को मुनाफावसूली के जोखिम को लेकर भी आगाह किया है। बाजार में तेजी आने के बाद घरेलू निवेशक ऊंचे स्तरों पर अपने शेयर बेचकर मुनाफा निकाल सकते हैं। इससे बाजार में कुछ समय के लिए दबाव बन सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

सेंसेक्स का 80 हजार के पार पहुंचना बाजार के लिए एक अहम उपलब्धि है, लेकिन लगातार तेजी के बाद निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के अच्छे नतीजे बाजार को मजबूती दे रहे हैं, वहीं ग्लोबल बाजारों की गिरावट और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का जोखिम भी बना हुआ है।

ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश न करें। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों का जोखिम रहता है।