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5 कारोबारी दिनों में रुपये में बड़ी गिरावट, डॉलर के मुकाबले 2.30 रुपये टूटा

 

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बना हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 कारोबारी दिनों में रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 230 पैसे यानी 2.30 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट बाजार में बढ़ती अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच देखने को मिली है।

जानकारी के मुताबिक, पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन यानी 8 मई को रुपया मजबूती के साथ 93.51 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। उस समय बाजार में रुपये में हल्की तेजी का रुझान देखा गया था और निवेशकों का भरोसा भी अपेक्षाकृत स्थिर था।

हालांकि इसके बाद इस सप्ताह रुपये में लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा हर कारोबारी सत्र में कमजोर होती चली गई। बाजार के दबाव के चलते रुपये पर बिकवाली हावी रही, जिससे इसकी कीमत में लगातार गिरावट दर्ज की गई।

15 मई को स्थिति और बिगड़ गई, जब रुपया गिरकर 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह स्तर पिछले सप्ताह की तुलना में एक बड़ा अंतर दर्शाता है और मुद्रा बाजार में तेज उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारक रुपये पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर असर डाल रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में डॉलर की मजबूती का सीधा असर रुपये पर देखने को मिलता है।

मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पूंजी निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। वहीं आयात बिल बढ़ने से भी डॉलर की मांग में इजाफा होता है, जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रुपये की यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और आने वाले समय में अगर वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं, तो इसमें स्थिरता लौट सकती है।

सरकारी और केंद्रीय बैंक की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप कर रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकता है।