RBI Cyber Fraud Rules: साइबर फ्रॉड के शक में बैंक लगा सकेंगे खाते पर Debit Hold, जानें 60 दिन वाला नया नियम
साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Money Mule Accounts से निपटने के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर बैंक को किसी खाते या ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी का संदेह होता है, तो वह संबंधित रकम या जरूरत पड़ने पर पूरे खाते पर अस्थायी Debit Hold लगा सकता है.
हालांकि, यह होल्ड अनिश्चित समय तक नहीं रहेगा. अगर पुलिस या किसी सक्षम एजेंसी की ओर से इसे जारी रखने का अलग निर्देश नहीं मिलता है, तो प्रस्तावित नियमों के तहत इसकी अधिकतम अवधि 60 दिन होगी.
Money Mule Account क्या होता है?
Money Mule Account ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी तरीके से प्राप्त रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है.
RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, बैंक अपने Transaction Monitoring Systems के जरिए ऐसे लेन-देन की पहचान करेंगे. इन सिस्टम में जरूरत के मुताबिक Artificial Intelligence और Machine Learning आधारित तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
अगर किसी ग्राहक के खाते में उसकी सामान्य आय या प्रोफाइल के मुकाबले अचानक असामान्य रकम का लेन-देन दिखाई देता है, तो बैंक उसे जांच के लिए फ्लैग कर सकता है. पहले से फ्रॉड या Money Mule के तौर पर रिपोर्ट किए गए खाते से जुड़ा ट्रांजैक्शन भी संदिग्ध माना जा सकता है.
संदिग्ध रकम पर तुरंत लग सकता है Hold
प्रस्तावित नियमों के तहत जैसे ही बैंक को किसी ट्रांजैक्शन या खाते पर संदेह होता है, वह संदिग्ध रकम पर Debit Hold लगा सकता है. अगर पूरा अकाउंट संदिग्ध पाया जाता है, तो बैंक पूरे खाते पर भी अस्थायी होल्ड लगा सकता है.
हालांकि, RBI के प्रस्ताव में पूरे खाते पर Debit Hold को अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की बात कही गई है. बैंकों को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे वास्तविक ग्राहकों के वैध ट्रांजैक्शन गलती से प्रभावित न हों.
ग्राहक को देनी होगी जानकारी
अगर किसी खाते या रकम पर Debit Hold लगाया जाता है, तो बैंक को ग्राहक को इसकी सूचना देनी होगी.
ग्राहक का मोबाइल नंबर या ईमेल बैंक के रिकॉर्ड में उपलब्ध होने पर डिजिटल माध्यम से सूचना दी जा सकती है. वहीं, अगर फिजिकल माध्यम से नोटिस भेजा जाता है तो प्रस्ताव के मुताबिक अगले दिन के अंत तक इसकी जानकारी भेजनी होगी.
ग्राहक को जवाब देने के लिए 20 दिन
Debit Hold लगने के बाद ग्राहक को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. प्रस्तावित नियमों के अनुसार ग्राहक को जवाब देने के लिए 20 दिन का समय मिलेगा.
अगर ग्राहक बैंक को यह स्पष्ट करता है कि संबंधित ट्रांजैक्शन वैध है, तो बैंक को उसका जवाब मिलने के 10 दिन के भीतर मामले पर फैसला करना होगा. यदि बैंक ग्राहक की सफाई से संतुष्ट होता है, तो Debit Hold हटाया जा सकेगा.
अगर ग्राहक की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता, तो बैंक को होल्ड लगाए जाने की तारीख से 30 दिन के भीतर मामले पर फैसला करना होगा.
60 दिन के बाद क्या होगा?
अगर बैंक होल्ड जारी रखने का फैसला करता है, तो मामले को संबंधित पुलिस अथॉरिटी या सक्षम एजेंसी के पास भेजा जा सकता है.
RBI के प्रस्ताव के अनुसार, अगर पुलिस या किसी अन्य सक्षम एजेंसी की तरफ से होल्ड जारी रखने का विशेष निर्देश नहीं मिलता, तो बैंक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे हटाना होगा. प्रस्ताव में अस्थायी Debit Hold की अधिकतम अवधि 60 दिन रखी गई है.
Debit Card को लेकर क्या है नियम?
RBI के इस ड्राफ्ट में Debit Card को अलग से ब्लॉक करने का कोई नया प्रावधान नहीं बताया गया है. प्रस्ताव सीधे बैंक खाते या संदिग्ध रकम पर Debit Hold लगाने से संबंधित है.
हालांकि, अगर पूरे बैंक खाते पर होल्ड लगाया जाता है, तो उस खाते से जुड़े Debit Card के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन भी प्रभावित हो सकते हैं.
बैंकों को STR भी दाखिल करनी होगी
संदिग्ध खाते पर Debit Hold लगाने की प्रक्रिया से बैंकों की Suspicious Transaction Report यानी STR दाखिल करने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी.
अगर जांच में कोई अकाउंट Money Mule के तौर पर सामने आता है, तो बैंक को इसकी जानकारी Financial Intelligence Unit-India यानी FIU-IND को देनी होगी.
इसके अलावा, बैंकों को लगाए गए Temporary Debit Holds का रिकॉर्ड भी रखना होगा. इसमें होल्ड लगाने की वजह, ग्राहक के साथ हुई बातचीत और पुलिस या अन्य एजेंसी को भेजी गई जानकारी शामिल हो सकती है.
रिकॉर्ड रखने की भी होगी जिम्मेदारी
प्रस्तावित नियमों के तहत बैंकों को इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे. ऐसे रिकॉर्ड को कम से कम 5 साल तक रखने का प्रस्ताव है. वहीं, अकाउंट बंद होने के बाद भी संबंधित रिकॉर्ड को कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.
कब लागू हो सकते हैं नए नियम?
RBI ने इन प्रावधानों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, प्रस्ताव के मुताबिक कोई बैंक चाहे तो इससे पहले भी इस व्यवस्था को लागू कर सकता है.
फिलहाल ये प्रावधान ड्राफ्ट के रूप में हैं. अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इनकी वास्तविक प्रक्रिया और लागू होने की तारीख को अंतिम माना जाएगा.