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कच्चे तेल की तेजी का असर: नायरा ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, भोपाल में पेट्रोल ₹120 के पार पहुंचा

 

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। निजी फ्यूल रिटेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में सीधे 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। नई कीमतें शनिवार, 3 अक्टूबर की सुबह से लागू हो गई हैं।

नायरा एनर्जी के इस फैसले का असर देशभर में उसके पेट्रोल पंपों पर दिखाई देगा। कंपनी के देशभर में 7,108 से ज्यादा फ्यूल स्टेशन हैं। कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी बनी हुई है। कंपनी ने बढ़ती लागत और मौजूदा रिटेल कीमतों के बीच अंतर को कम करने के लिए यह कदम उठाया है।

भोपाल में इस बढ़ोतरी के बाद नायरा के पंप पर पेट्रोल की कीमत करीब 119.54 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 103.64 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है। यानी जिन लोगों को नायरा के पंप से पेट्रोल या डीजल खरीदना है, उन्हें अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

इस साल दूसरी बार नायरा ने बढ़ाए दाम

नायरा एनर्जी ने इस साल इससे पहले भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इसी तरह की बढ़ोतरी की थी। मार्च में ईरान संघर्ष और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर पड़े असर के बीच कंपनी ने पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था।

हालांकि, बाद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलने के बाद कंपनी ने जुलाई में पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर कम कर दिए थे। अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बीच नायरा ने कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।

सरकारी कंपनियों ने अभी नहीं बढ़ाए दाम

नायरा के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी तेल कंपनियां भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाएंगी?

फिलहाल इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने रिटेल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस बढ़ोतरी के साथ कोई बदलाव नहीं किया है। जियो-बीपी की कीमतों में भी फिलहाल इसी तरह की बढ़ोतरी की सूचना नहीं है।

इस वजह से निजी और सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों के बीच कीमतों का अंतर बढ़ सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेजी बनी रहती है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।

सरकारी तेल कंपनियों पर भी बढ़ा लागत का दबाव

दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियां भी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों से दबाव में हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक सितंबर में IOC, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब 9 रुपये प्रति लीटर की नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन का सामना करना पड़ रहा था।

ICRA ने अनुमान लगाया था कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG को मिलाकर सरकारी तेल कंपनियों का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब 530 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा था।

इसका मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जबकि घरेलू रिटेल कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में तेल कंपनियों की खरीद लागत और बिक्री कीमत के बीच अंतर बढ़ गया है।

आगे क्या होगा?

नायरा एनर्जी की ओर से पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी ने एक बार फिर देश में ईंधन की कीमतों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अगर अंतरराष्ट्रीय क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों की लागत पर दबाव बना रह सकता है।

फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया है, लेकिन आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की चाल पर सबकी नजर रहेगी। आम लोगों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, माल ढुलाई और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत पर पड़ सकता है।