Petrol Diesel Price Today : 100 डॉलर पार हुआ कच्चा तेल, फिर भी नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें आज के रेट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में आखिरी संशोधन 25 मई को हुआ था। उस समय पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में करीब 2.7 से 2.8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद से घरेलू बाजार में ईंधन के रेट स्थिर बने हुए हैं।
आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल कितने रुपये लीटर?
शहर पेट्रोल डीजल
दिल्ली ₹102.12 ₹95.20
मुंबई ₹111.31 ₹97.97
कोलकाता ₹113.51 ₹99.82
चेन्नई ₹107.78 ₹99.56
गुरुग्राम ₹102.97 ₹95.94
पटना ₹113.35 ₹99.36
नागपुर ₹111.90 ₹98.20
श्रीनगर ₹104.10 ₹92.81
इंदौर ₹114.32 ₹99.41
108 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 108.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। पिछले एक सप्ताह में इसकी कीमत में करीब 6 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।
वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी बढ़त के साथ करीब 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक संघर्ष चलने की आशंका से तेल बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ गया है। 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ।
रोज समीक्षा के बावजूद क्यों स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के लिए डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी करती हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर छोटे उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की स्थिति तथा अन्य लागत को ध्यान में रखकर खुदरा कीमतों में बदलाव करती हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने के बावजूद फिलहाल घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम में स्थिरता बनी हुई है।
महंगा कच्चा तेल भारत के लिए क्यों चिंता की बात?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर भी असर पड़ सकता है।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर परिवहन लागत पर पड़ सकता है। माल ढुलाई महंगी होने की स्थिति में फल, सब्जियां और रोजमर्रा की दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
फिलहाल आम लोगों के लिए राहत की बात यही है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगाई लंबे समय तक बनी रहती है तो आगे तेल कंपनियों के फैसले पर सभी की नजर रहेगी।