Petrol Diesel Price Today Alert : कच्चा तेल हुआ महंगा आम आदमी की जेब पर बढ़ सकता है बोझ
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है जो पिछले कई महीनों के उच्च स्तर पर है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब देश में ईंधन की खपत भी बढ़ रही है। रोजाना यात्रा करने वाले लोगों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक हर किसी की नजर अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर टिकी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
100 डॉलर के करीब पहुंचा क्रूड ऑयल
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत इस समय 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में यह 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था।
वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। इसमें एक फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।
भारत के लिए यह तेजी इसलिए अहम है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और इसका दबाव घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ने की संभावना रहती है।
इन शहरों में पेट्रोल डीजल के दाम
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है।
मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 113.51 रुपये जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है।
चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर है।
बरेली में पेट्रोल 102.25 रुपये और डीजल 95.46 रुपये प्रति लीटर है।
पटना में पेट्रोल 113.35 रुपये और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
रांची में पेट्रोल की कीमत 106.12 रुपये जबकि डीजल 100.49 रुपये प्रति लीटर है।
आगरा में पेट्रोल 101.90 रुपये और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर है।
ग्वालियर में पेट्रोल 114.30 रुपये और डीजल 99.35 रुपये प्रति लीटर है।
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में हलचल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच जहाजों और तेल टैंकरों को लेकर तनाव बढ़ने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित किया है। तेल व्यापारियों को आशंका है कि अगर हालात और बिगड़े तो सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
मिडिल ईस्ट में तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है।
दुनिया भर के तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
तनाव बढ़ने के बाद इस रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आने की बात सामने आई है। सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण निवेशकों और तेल कारोबारियों ने खरीदारी बढ़ा दी है जिससे कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
भारत में क्या होगा असर
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत का तेल आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर सरकार के वित्तीय गणित और आम लोगों की जेब दोनों पर पड़ सकता है।
हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी होगी या नहीं यह घरेलू टैक्स नीति तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ता है और होर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत समेत दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।