☰
×

70 साल के होते ही 6 कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे नोएल टाटा, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और लिस्टिंग पर विवाद

 

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 साल के होने जा रहे हैं। टाटा समूह की रिटायरमेंट पॉलिसी के तहत वह कई प्रमुख कंपनियों के बोर्ड से हटने की तैयारी में हैं। हालांकि, वह टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर बने रहेंगे।यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति, कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग और समूह के कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों को लेकर मतभेद चर्चा में हैं। आइए जानते हैं इस पूरे मामले से जुड़े 10 अहम सवालों के जवाब।

सवाल 1: किन कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे नोएल टाटा?

नोएल टाटा टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों में अपने पद छोड़ने जा रहे हैं। इनमें ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन, टाटा इंटरनेशनल, ट्रेंट हाइपरमार्केट और दुबई स्थित टाटा इंटरनेशनल वेस्ट एशिया DMCC शामिल हैं।

इसके अलावा, वह टाटा स्टील और टाइटन कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरमैन तथा इंडिटेक्स ट्रेंट रिटेल इंडिया में डायरेक्टर के पद से भी इस्तीफा देंगे।

सवाल 2: क्या वह किसी ऑपरेटिंग कंपनी के बोर्ड में बने रहेंगे?

नोएल टाटा ट्रेंट और टेस्को के संयुक्त उद्यम ट्रेंट हाइपरमार्केट के बोर्ड में बने रहेंगे। यह कंपनी स्टार बाजार और स्टार डेली जैसे रिटेल स्टोर संचालित करती है। उनके अलग-अलग कंपनियों में पद और जिम्मेदारियां संबंधित बोर्ड की व्यवस्था के अनुसार तय होंगी।

सवाल 3: 70 साल की उम्र में रिटायरमेंट का नियम क्या है?

टाटा समूह की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल और नॉन-एग्जीक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के लिए 70 साल बताई गई है।

नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 वर्ष के हो जाएंगे। ऐसे में ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड से उनका हटना समूह की रिटायरमेंट पॉलिसी से जुड़ा कदम माना जा रहा है।

सवाल 4: टाटा संस के बोर्ड में कैसे बने रहेंगे नोएल टाटा?

टाटा संस में नोएल टाटा की भूमिका दूसरी कंपनियों से अलग है। वह यहां टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

इसलिए ऑपरेटिंग कंपनियों में नॉन-एग्जीक्यूटिव पद छोड़ने के बावजूद टाटा संस में उनकी भूमिका जारी रह सकती है। हालांकि, इस पद पर बने रहने का आधार संबंधित कंपनी के नियम और नामांकन व्यवस्था है।

सवाल 5: उनके हटने से कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

नोएल टाटा के पद छोड़ने के बाद संबंधित कंपनियों में नेतृत्व और बोर्ड की जिम्मेदारियों में बदलाव करना होगा। ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इंटरनेशनल और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन में चेयरमैन पदों को लेकर नई व्यवस्था करनी पड़ सकती है। वहीं, टाटा स्टील और टाइटन में वाइस-चेयरमैन पद भी प्रभावित होंगे।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिहाज से वरिष्ठ पदाधिकारियों का तय रिटायरमेंट नियमों का पालन करना संस्थागत अनुशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

सवाल 6: एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच विवाद क्या है?

इस विवाद का एक प्रमुख मुद्दा टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति है। रिपोर्टों के मुताबिक, 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दी थी।

बताया गया है कि नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया, बोर्ड के अधिकारों और टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे।

सवाल 7: चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर नोएल टाटा की आपत्ति क्या है?

नोएल टाटा की आपत्ति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में मौजूद नियमों की व्याख्या से जुड़ी बताई जा रही है। उनका तर्क है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसलों के लिए टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित डायरेक्टर्स की मंजूरी जरूरी है।

टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन हैं। रिपोर्टों के अनुसार, श्रीनिवासन ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया।

नोएल टाटा का कहना है कि केवल बहुमत या चेयरमैन के कास्टिंग वोट के आधार पर ट्रस्ट्स के नॉमिनी की आवश्यक मंजूरी की शर्त को दरकिनार नहीं किया जा सकता। इस मामले में नियमों की वास्तविक व्याख्या और उनका लागू होना महत्वपूर्ण होगा।

सवाल 8: 26 अक्टूबर के पत्र में नोएल टाटा ने क्या मांगा?

रिपोर्टों के मुताबिक, नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्राकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।

इनमें 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग के अंतिम मिनट्स, वोटिंग रिकॉर्ड और बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल बताई गई हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या नियुक्ति के लिए निर्धारित चयन समिति बनाई गई थी।

इसके अलावा, उन्होंने चंद्रशेखरन और वेणु श्रीनिवासन के परिवारों से जुड़े कारोबारी सौदों में संभावित हितों के टकराव को लेकर भी जानकारी मांगी है। ये सवाल नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े हैं।

सवाल 9: चंद्रशेखरन की उम्र का इस विवाद से क्या संबंध है?

एन. चंद्रशेखरन की उम्र और उनका प्रस्तावित कार्यकाल भी चर्चा का विषय है। रिपोर्ट के अनुसार, वह 63 साल के हैं और 2 जून 2028 को 65 वर्ष के हो जाएंगे।

टाटा समूह की पॉलिसी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए 65 साल की रिटायरमेंट उम्र निर्धारित बताई गई है। ऐसे में अगर उनका कार्यकाल 2032 तक रहता है, तो उम्र संबंधी नियमों और किसी संभावित छूट की व्यवस्था पर सवाल उठ सकते हैं।

हालांकि, इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, नियुक्ति की शर्तों और लागू छूट पर निर्भर करेगी।

सवाल 10: टाटा संस की लिस्टिंग पर दोनों पक्षों में क्या मतभेद है?

टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग भी इस विवाद का अहम मुद्दा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है। इस वर्गीकरण के कारण कंपनी की लिस्टिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर चर्चा बनी हुई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, एन. चंद्रशेखरन की ओर से लिस्टिंग की तैयारियों पर विचार किया जा रहा है, जबकि नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स इस विकल्प के पक्ष में नहीं है।

इस तरह टाटा समूह के भीतर रिटायरमेंट पॉलिसी, चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति, बोर्ड के अधिकारों और टाटा संस की लिस्टिंग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले समय में इन मामलों पर होने वाले फैसले समूह की कॉर्पोरेट गवर्नेंस व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।