Minimum Balance Rule: बैंक ग्राहकों पर भारी पड़ा मिनिमम बैलेंस, जुर्माने से बैंकों ने कमाए ₹26,100 करोड़
देश के कई बैंक ग्राहकों से ज़रूरी मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने पर पेनल्टी वसूलते हैं। बैंकिंग नियमों के तहत, ग्राहकों को बैंक द्वारा तय मिनिमम एवरेज बैलेंस बनाए रखना होता है; ऐसा न करने पर पेनल्टी लगती है। अलग-अलग बैंकों ने मिलकर चार साल की अवधि में मिनिमम बैलेंस बनाए न रखने वाले ग्राहकों से ₹26,100 करोड़ की पेनल्टी वसूली है।
**HDFC और Axis बैंक ने सबसे ज़्यादा पेनल्टी वसूली**
वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया कि HDFC बैंक, Axis बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने उन ग्राहकों से सबसे ज़्यादा पेनल्टी वसूली, जो अपने खातों में मिनिमम बैलेंस बनाए रखने में नाकाम रहे। मंत्रालय ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर, दोनों तरह के बैंकों का डेटा शेयर किया। पब्लिक सेक्टर बैंकों का डेटा FY 2021-22 से FY 2025-26 तक का है, जबकि प्राइवेट सेक्टर बैंकों का डेटा FY 2022-23 से FY 2025-26 तक का है।
**HDFC बैंक लिस्ट में सबसे ऊपर**
मंत्रालय के डेटा के अनुसार, HDFC बैंक ने मिनिमम बैलेंस बनाए न रखने वाले ग्राहकों से सबसे ज़्यादा पेनल्टी - ₹5,670 करोड़ - वसूली है। इसके बाद Axis बैंक ने ₹3,787 करोड़ और बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने लगभग ₹2,028 करोड़ की पेनल्टी वसूली है। पंजाब नेशनल बैंक इस लिस्ट में चौथे स्थान पर है, जिसने ₹1,896 करोड़ की पेनल्टी वसूली है। इंडियन बैंक ने FY 2021-22 और FY 2025-26 के बीच ग्राहकों से ₹1,777 करोड़ की पेनल्टी वसूली है।
**सरकार ने राज्यसभा में डेटा शेयर किया**
सरकार ने 28 जुलाई को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह डेटा शेयर किया। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने MAB बनाए न रखने पर पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों द्वारा लगाए गए चार्ज की जानकारी दी। सरकार ने यह भी कहा कि ज़्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंकों ने सेविंग्स अकाउंट के लिए यह पेनल्टी पहले ही हटा दी है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि इन बैंकों ने बैंकिंग को ज़्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए अपने सर्विस चार्ज स्ट्रक्चर की समीक्षा की है। 12 में से 10 सरकारी बैंक MAB से जुड़ा जुर्माना नहीं लगाते हैं।
मंत्री ने बताया कि 12 में से 10 सरकारी बैंकों ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने पर जुर्माना लगाना बंद कर दिया है। बाकी दो बैंकों ने बोर्ड से मंज़ूर नीतियों और बिज़नेस की ज़रूरतों के हिसाब से जुर्माने में बदलाव किया है।