कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बदला बाजार का मिजाज; सेंसेक्स 1400 अंक उछला, 74,000 के पार बंद
भारतीय शेयर बाजार में 15 अक्टूबर को शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक उछलकर 74,200 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 400 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,000 के पार निकल गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को एक अहम वजह माना जा रहा है।आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, सरकारी बैंकों के शेयरों पर दबाव रहा और इनमें बिकवाली दर्ज की गई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
कच्चा तेल सस्ता होने से बाजार को राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को राहत दी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, WTI क्रूड करीब 1.05% गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में लगभग 1.63% की गिरावट आई और यह 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतें कम होने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव घट सकता है। इससे अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद रहती है और शेयर बाजार की धारणा बेहतर हो सकती है।हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ही बाजार की तेजी की एकमात्र वजह हो, यह जरूरी नहीं है। वैश्विक संकेत, निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के शेयरों में होने वाले उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा तय करते हैं।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
जहां भारतीय बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं कई प्रमुख एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 7.79% गिरकर 5,527 के स्तर पर रहा। जापान का निक्केई 4.81% टूटकर 64,489 पर पहुंचा, जबकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1.21% गिरकर 24,009 के स्तर पर रहा।
एशियाई बाजारों में इस तरह की गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में तेजी निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बनी रही।
अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद
14 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। डाउ जोन्स करीब 49 अंक यानी 0.09% गिरा। नैस्डैक में 1.88% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि S&P 500 इंडेक्स 1.11% नीचे बंद हुआ।
वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय बाजार की तेजी यह दिखाती है कि अलग-अलग बाजारों पर घरेलू परिस्थितियों और सेक्टरों की खरीदारी का भी असर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII/FPI की बिकवाली बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बीते सात दिनों में करीब 8,440 करोड़ रुपये के शेयरों की नेट बिकवाली की। बीते 30 दिनों का आंकड़ा लगभग 86,263 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली दर्शाता है।
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने खरीदारी के जरिए बाजार को सहारा दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, घरेलू निवेशकों की बीते सात दिनों की नेट खरीदारी करीब 12,898 करोड़ रुपये रही।
घरेलू निवेशकों की खरीदारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है, लेकिन बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
पिछले कारोबारी दिन बाजार में रही थी गिरावट
15 अक्टूबर की तेजी से पहले पिछले कारोबारी दिन बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में आज की बढ़त ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। आईटी और ऑटो शेयरों में खरीदारी तथा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बाजार को सहारा देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयर बाजार में बड़ी तेजी के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों के संकेत और कंपनियों के नतीजे आगे बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,000 के पार पहुंच गया। हालांकि, वैश्विक बाजारों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।