शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों के ₹15,003 करोड़ स्वाहा, जानिए आज क्यों लुढ़के सेंसेक्स और निफ्टी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की संपत्ति में करीब 15,003 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स में सैकड़ों अंकों की कमजोरी देखने को मिली, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों—बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल और फाइनेंशियल शेयरों—में बिकवाली का दबाव रहा।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जिससे महंगाई बढ़ने और भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका बढ़ गई है।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
बाजार पर दबाव का एक और बड़ा कारण भारतीय रुपये में कमजोरी रही। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव?
सोमवार के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है।
हालांकि एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू की है, जिससे लंबी अवधि में बाजार को सहारा मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़ी है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक अभी भी अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं।