LTCG Tax: शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए SBI का सुझाव, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स खत्म करने की मांग
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार हो रही निकासी के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अर्थशास्त्रियों ने सरकार को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म करने का सुझाव दिया है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से निवेशकों को लंबे समय तक शेयर बाजार में पैसा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। साथ ही विदेशी पूंजी के अचानक बाहर जाने से पैदा होने वाली अस्थिरता को कम करने में मदद मिल सकती है।
12 अक्टूबर को जारी ‘इकोरैप’ रिपोर्ट में SBI रिसर्च ने शेयर बाजार में निवेश की अवधि बढ़ाकर दो से तीन साल करने और शेयरों पर लगने वाला LTCG टैक्स समाप्त करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है। हालांकि, यह फिलहाल अर्थशास्त्रियों का सुझाव है, सरकार की ओर से टैक्स खत्म करने का घोषित फैसला नहीं।
विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में निकाले 44,166 करोड़ रुपये
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 44,166 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।
इसके साथ ही 2026 में शेयर बाजार से उनकी कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह पूरे 2025 में दर्ज 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी ज्यादा है।
SBI रिसर्च का मानना है कि विदेशी निवेश की अचानक निकासी से घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसका दबाव भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है।
अभी शेयरों पर कितना लगता है LTCG टैक्स?
फिलहाल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को शेयरों में निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% टैक्स देना पड़ता है। यह दर 2024 में किए गए कर बदलावों के बाद लागू हुई थी और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसे बरकरार रखा गया।
SBI रिसर्च के सुझाव के अनुसार, शेयरों पर LTCG टैक्स खत्म करने से निवेशकों को लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। रिपोर्ट में निवेश की अवधि दो से तीन साल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि बाजार में अस्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।
विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं पैसा?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला बढ़ता प्रतिफल शामिल हैं। इन परिस्थितियों में निवेशक दूसरे बाजारों की तुलना में अपने निवेश के विकल्पों का दोबारा आकलन कर रहे हैं।
इसके अलावा, उत्तर एशिया के बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी भी विदेशी पूंजी को आकर्षित कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में AI आधारित शेयरों के सीमित विकल्प और दूसरे बाजारों में अपेक्षाकृत बेहतर जोखिम-प्रतिफल मिलने से भी भारतीय शेयरों से निवेश निकल रहा है।
निर्यात से मिली रकम छह महीने में वापस लाने का सुझाव
SBI रिसर्च ने निर्यात से प्राप्त विदेशी मुद्रा को देश में वापस लाने की प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातक आमतौर पर विदेशी खरीदारों को लगभग छह महीने तक का उधार देते हैं। इसलिए निर्यात से मिली रकम को करीब छह महीने के भीतर देश में वापस लाने की व्यवस्था को स्पष्ट और व्यवस्थित किया जाना चाहिए। इससे अधिक समय की अनुमति अलग-अलग मामलों के आधार पर देने का सुझाव दिया गया है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए नियमों में स्पष्टता की मांग
रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने और देश के बाहरी खातों को स्थिर रखने के लिए कुछ अन्य नीतिगत बदलावों का भी सुझाव दिया गया है। इसमें विदेशी मुद्रा में लिए जाने वाले बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ECB) पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) के नियमों को स्पष्ट करने की बात शामिल है। फिलहाल इस पर लागू कर की दर 5% से 20% तक हो सकती है।
इसके अलावा, दोहरे कराधान से बचाव समझौतों (DTAA) के तहत मिलने वाली छूट और सामान्य व विशिष्ट कर प्रावधानों को लागू करने में एकरूपता लाने की जरूरत बताई गई है। SBI रिसर्च के अनुसार, नियमों में स्पष्टता से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और भारत में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल LTCG टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव SBI रिसर्च की सिफारिश तक सीमित है। इस पर सरकार कोई फैसला लेती है या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।