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KVP Rules: किसान विकास पत्र में पैसा फंसता नहीं, जानिए ट्रांसफर, गिरवी और समय से पहले निकासी के नियम
 

 

किसान विकास पत्र यानी KVP को लंबे समय के लिए सुरक्षित बचत का विकल्प माना जाता है। आम धारणा है कि एक बार KVP में पैसा लगाने के बाद इसे मैच्योरिटी तक निकालना संभव नहीं होता, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में KVP को दूसरे पोस्ट ऑफिस में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके अलावा इसे निर्धारित संस्थाओं के पक्ष में सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखने और कुछ मामलों में मैच्योरिटी से पहले भुनाने की सुविधा भी मिलती है।
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 7.5% ब्याज
1 अप्रैल 2026 से खोले गए KVP खातों पर अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए ब्याज दर 7.5% निर्धारित है। इस ब्याज दर के हिसाब से निवेश की मैच्योरिटी अवधि 115 महीने यानी 9 साल 7 महीने है।
KVP की एक खास बात यह है कि खाता खोलते समय जो ब्याज दर लागू होती है, उसी के आधार पर उसकी मैच्योरिटी अवधि तय की जाती है। इसलिए निवेश से पहले उस समय लागू दर और मैच्योरिटी अवधि को जरूर देखना चाहिए।
दूसरे पोस्ट ऑफिस में कर सकते हैं ट्रांसफर
अगर KVP धारक अपना निवेश किसी दूसरे पोस्ट ऑफिस से संचालित करना चाहता है, तो अकाउंट ऑफिस ट्रांसफर की सुविधा उपलब्ध है। इसका मतलब केवल यह है कि KVP का संचालन दूसरे पोस्ट ऑफिस से होगा।
इस प्रक्रिया में निवेश का मालिक नहीं बदलता। यानी KVP जिस व्यक्ति के नाम पर है, उसका स्वामित्व पहले की तरह उसी के पास रहता है।
अपनी मर्जी से किसी को नहीं कर सकते ट्रांसफर
KVP को सामान्य तरीके से किसी दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना संभव नहीं है। हालांकि नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों में स्वामित्व ट्रांसफर का प्रावधान है।
अकाउंट होल्डर की मृत्यु, कोर्ट के आदेश या सिक्योरिटी के तौर पर किए गए ट्रांसफर जैसी स्थितियों में नियमों के मुताबिक KVP दूसरे व्यक्ति या संस्था के नाम किया जा सकता है।
अगर KVP जॉइंट अकाउंट है और किसी एक धारक की मृत्यु हो जाती है, तो परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार यह बाकी बचे धारक या धारकों के नाम जारी रह सकता है।
लोन के लिए सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल
कुछ मामलों में KVP को किसी दायित्व के बदले सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखा जा सकता है। इसके लिए निर्धारित संस्थाओं के पक्ष में KVP ट्रांसफर किया जा सकता है।
इन संस्थाओं में RBI, शेड्यूल्ड बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या सोसाइटी, कुछ सरकारी कंपनियां, स्थानीय प्राधिकरण और पात्र हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और संबंधित संस्था की स्वीकृति जरूरी होती है।
मैच्योरिटी से पहले भी बंद हो सकता है KVP
KVP को सेविंग अकाउंट की तरह कभी भी अपनी जरूरत के हिसाब से बंद नहीं किया जा सकता। India Post के नियमों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में KVP को 2 साल और 6 महीने पूरे होने के बाद प्रीमैच्योरली भुनाया जा सकता है।
इसके अलावा अकाउंट होल्डर की मृत्यु, पात्र प्लेजी द्वारा सिक्योरिटी जब्त किए जाने या कोर्ट के आदेश जैसी विशेष परिस्थितियों में भी प्रीमैच्योर क्लोजर का प्रावधान है।
समय से पहले पैसा निकालने पर हो सकता है नुकसान
KVP को मैच्योरिटी से पहले बंद करने पर निवेशक को पूरी मैच्योरिटी रकम नहीं मिलती। ऐसे में मिलने वाली राशि मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम से कम हो सकती है।
इसलिए अगर आपको भविष्य में अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो KVP में निवेश करने से पहले इसकी लॉक-इन जैसी शर्तों, मैच्योरिटी अवधि और प्रीमैच्योर क्लोजर के नियमों को अच्छी तरह समझना जरूरी है। KVP को मुख्य रूप से लंबी अवधि की बचत के नजरिए से देखना बेहतर है।