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Onion Price Control का सरकारी Formula जानिए कब और कैसे बाजार में आता है सस्ता प्याज
 

 


बारिश का मौसम हो या फिर त्योहारों का समय प्याज की बढ़ती कीमतें अक्सर आम लोगों के किचन का बजट बिगाड़ देती हैं। कई बार फसल खराब होने से बाजार में सप्लाई घट जाती है तो कभी मांग बढ़ने के कारण प्याज के भाव अचानक ऊपर चले जाते हैं।

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार पहले से एक खास तैयारी करती है। इसे प्याज का बफर स्टॉक कहा जाता है। इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ कीमतों को नियंत्रित करना नहीं बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखना भी है।

क्या है प्याज का बफर स्टॉक
जब बाजार में प्याज की पैदावार ज्यादा होती है और कीमतें गिरने लगती हैं तब सरकार किसानों से बड़ी मात्रा में प्याज खरीदकर उसका भंडारण करती है। इस स्टॉक को जरूरत पड़ने तक सुरक्षित रखा जाता है।

बाद में जब बाजार में प्याज की कमी होने लगती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तब सरकार इसी भंडार से प्याज निकालकर बाजार में भेजती है।
इससे बाजार में सप्लाई बढ़ती है और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यानी बफर स्टॉक एक तरह से ऐसा सुरक्षा कवच है जिसका इस्तेमाल प्याज की कीमतों में अचानक होने वाले बड़े उतार चढ़ाव को रोकने के लिए किया जाता है।

किसानों से लेकर ग्राहकों तक कैसे काम करता है सिस्टम
अधिक उत्पादन के दौरान किसानों को अक्सर प्याज का उचित दाम नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में सरकारी खरीद किसानों को राहत देती है क्योंकि उनकी उपज का एक हिस्सा तय व्यवस्था के तहत खरीदा जाता है।

दूसरी ओर जब उत्पादन कम होने से बाजार में प्याज महंगा होने लगता है तो सरकार अपने बफर स्टॉक का इस्तेमाल करती है।
इस तरह एक ही व्यवस्था किसानों को कम कीमतों से होने वाले नुकसान से बचाती है और ग्राहकों को बढ़ती महंगाई से राहत देने की कोशिश करती है।
इस साल कितना प्याज खरीद रही है सरकार
सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने रबी प्याज की खरीद का लक्ष्य 2 लाख मीट्रिक टन तय किया है। खरीद प्रक्रिया 15 मई से शुरू हुई थी और अब तक करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदा जा चुका है।
पिछले सीजन 2025-26 में सरकार ने शुरुआत में 3 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। बाद में जरूरत को देखते हुए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 5 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया था।
अनुमान के मुताबिक 2026-27 में देश में कुल प्याज उत्पादन करीब 307 लाख मीट्रिक टन रह सकता है।


कीमत बढ़ते ही बाजार में कैसे पहुंचता है सरकारी प्याज
जब बाजार में प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं तब सरकार बफर स्टॉक से प्याज निकालकर अलग अलग राज्यों और शहरों में भेजना शुरू करती है।
सरकारी एजेंसियों के जरिए इसे NCCF और NAFED के आउटलेट पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा मोबाइल वैन सफल और केंद्रीय भंडार जैसे माध्यमों से भी आम लोगों तक रियायती दरों पर प्याज पहुंचाया जाता है।
जरूरत के समय प्याज को तेजी से एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे की भी मदद ली जाती है। इसी उद्देश्य से कांदा एक्सप्रेस जैसी विशेष मालगाड़ी सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
सरकारी प्याज आमतौर पर बाजार की स्थिति को देखते हुए करीब 25 से 35 रुपये प्रति किलो की रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जा सकता है।


आखिर क्यों जरूरी है बफर स्टॉक
प्याज ऐसी फसल है जिसकी कीमतों में बहुत तेजी से बदलाव देखने को मिलता है। एक समय अधिक उत्पादन होने पर किसानों को सही कीमत नहीं मिलती जबकि कुछ महीनों बाद सप्लाई कम होते ही यही प्याज महंगा हो जाता है।
बफर स्टॉक इसी असंतुलन को कम करने का सरकारी तरीका है। सरकार अधिक उत्पादन के समय खरीदारी कर किसानों को सहारा देती है और कमी के समय स्टॉक जारी कर उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने की कोशिश करती है।
यही वजह है कि सरकार हर साल प्याज की खरीद और भंडारण की योजना बनाती है। इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्याज के दाम न तो किसानों के लिए नुकसानदायक स्तर तक गिरें और न ही आम लोगों की पहुंच से बाहर हों।