रसोई का बजट बिगड़ा! 1 साल में भयंकर महंगी हुई शाकाहारी थाली, जानें क्या-क्या हुआ महंगा
महंगाई का असर सिर्फ बाजार में सामान खरीदते वक्त ही नहीं, बल्कि रोजाना की रसोई में भी साफ दिखाई दे रहा है। घर में बनने वाली साधारण वेज थाली की लागत भी लगातार बढ़ रही है। सब्जियों से लेकर खाने के तेल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव का सीधा असर आम परिवारों के किचन बजट पर पड़ रहा है।
टमाटर, प्याज और आलू जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के साथ खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल और गैस की कीमतों का असर अब थाली की लागत पर भी दिखाई दे रहा है।
अगस्त में कितनी महंगी हुई वेज थाली?
Crisil Intelligence की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में एक वेजिटेरियन थाली की औसत लागत 29.5 रुपये रही। जुलाई 2026 में यह कीमत करीब 29.1 रुपये थी। यानी एक महीने में थाली की कीमत में करीब 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अगर पिछले साल के अगस्त से तुलना करें, तब भी वेज थाली की कीमत लगभग 29.1 रुपये थी। इस तरह सालाना आधार पर भी इसमें करीब 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 के बाद उपलब्ध आंकड़ों में अगस्त 2026 की वेज थाली की लागत सबसे ज्यादा रही।
प्याज की बढ़ी कीमत ने बढ़ाया दबाव
वेज थाली महंगी होने की प्रमुख वजहों में प्याज की बढ़ती कीमत शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में प्याज की कीमत में करीब 43 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
अगस्त में प्याज का भाव करीब 28 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर लगभग 40 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। Crisil की रिपोर्ट में प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे सप्लाई में कमी को अहम वजह बताया गया है।
महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल के साथ-साथ उपलब्ध स्टॉक को भी नुकसान पहुंचा, जिसका असर सप्लाई पर पड़ा। सप्लाई कम होने से प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
तेल और गैस की कीमतों ने भी बढ़ाया किचन का खर्च
सिर्फ सब्जियां ही नहीं, बल्कि खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल और LPG भी वेज थाली की लागत को प्रभावित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में सब्जियों, खाद्य तेल और कुकिंग गैस की कीमतों में करीब 10 से 11 प्रतिशत तक का बदलाव देखा गया है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई से जुड़ी परेशानियों का असर भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा है। ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।
आलू और टमाटर ने दी थोड़ी राहत
हालांकि, सभी सब्जियों के दाम नहीं बढ़े हैं। कुछ जरूरी सब्जियों की कीमतों में गिरावट भी आई है, जिससे वेज थाली की लागत में बढ़ोतरी सीमित रही।
आंकड़ों के मुताबिक, आलू की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 12 प्रतिशत कम हुई है। वहीं टमाटर के दाम में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
यानी एक तरफ प्याज, तेल और गैस जैसी चीजों की बढ़ती कीमतों ने थाली को महंगा किया, तो दूसरी तरफ आलू और टमाटर के सस्ते होने से आम लोगों को कुछ राहत भी मिली।
कुल मिलाकर, रोजाना की रसोई में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग चीजों की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घर के खाने की लागत पर पड़ रहा है। आने वाले समय में सब्जियों और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें किस तरह रहती हैं, इसका असर वेज थाली की लागत पर भी देखने को मिलेगा।