×

IRDAI Insurance Rules: इंश्योरेंस बेचने के नियम बदलने की तैयारी, कमीशन से लेकर मिस-सेलिंग तक पर सख्ती; जानें प्रस्ताव
 

 

IRDAI Insurance Rules: इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में बीमा की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियम बदल सकते हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने बीमा की डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाने के लिए कई नए प्रस्ताव सामने रखे हैं।
रेगुलेटर ने बुधवार को 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' नाम से कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। फिलहाल ये बदलाव सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर हैं। IRDAI ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं और कमेंट भेजने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
ग्राहक को साफ दिखाई देगी कमीशन की जानकारी
प्रस्ताव के तहत इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन संस्थानों को अपनी कमीशन पॉलिसी और स्ट्रक्चर को आसान भाषा में बताना पड़ सकता है।
कुछ कमर्शियल इंश्योरेंस पॉलिसी में भी कमीशन से जुड़ी जानकारी देने का प्रस्ताव है। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि पॉलिसी की कीमत में डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी लागत किस तरह शामिल है।
IRDAI कमीशन की सीमा में भी बदलाव पर विचार कर रहा है। यह सीमा पॉलिसी के प्रकार, बिजनेस सेगमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और पॉलिसी बेचने व सर्विस देने में लगने वाली मेहनत जैसे कारकों के आधार पर तय की जा सकती है।
किसके जरिए खरीद रहे हैं इंश्योरेंस, यह होगा स्पष्ट
रेगुलेटर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के मौजूदा ढांचे को सरल बनाने का भी प्रस्ताव लेकर आया है। इसका उद्देश्य ग्राहक के लिए यह समझना आसान बनाना है कि वह किस डिस्ट्रीब्यूटर या इंटरमीडियरी के जरिए पॉलिसी खरीद रहा है और उसकी भूमिका क्या है।
इससे पॉलिसी लेते समय ग्राहक को बीमा बेचने वाले और उसकी जिम्मेदारियों से जुड़ी जानकारी ज्यादा स्पष्ट तरीके से मिल सकती है।
Mis-Selling रोकने पर भी फोकस
IRDAI के प्रस्तावों में मिस-सेलिंग यानी ग्राहक की जरूरत से अलग या गलत तरीके से इंश्योरेंस बेचने की समस्या पर भी जोर दिया गया है।
प्रस्ताव में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, मौद्रिक और गैर-मौद्रिक सभी तरह के रिवॉर्ड को कमीशन की परिभाषा में शामिल करने की बात कही गई है।
इसके अलावा बैंक और NBFC के कर्मचारियों को इंश्योरेंस बेचने के लिए वॉल्यूम या रिवॉर्ड आधारित इंसेंटिव देने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।


पॉलिसी बेचने वाले की पहचान से जुड़े नए नियम
प्रस्ताव के तहत पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को संबंधित इंश्योरेंस पॉलिसी से जोड़ने की व्यवस्था लाई जा सकती है। मिस-सेलिंग की घटनाओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का भी प्रस्ताव है।
अगर किसी मामले में गलत बिक्री साबित होती है तो संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर या व्यक्ति से कमीशन वापस लेने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
इसके अलावा किसी दूसरे वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस के साथ इंश्योरेंस को जबरन बंडल करने पर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या इंश्योरेंस पॉलिसी सस्ती हो सकती है?
IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों की लागत और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च को कम करने के लिए भी कई बदलाव सुझाए हैं। रेगुलेटर का मानना है कि लंबे समय में अगर डिस्ट्रीब्यूशन और स्ट्रक्चरल कॉस्ट कम होती है तो इसका असर इंश्योरेंस की कीमत पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि नए नियम लागू होते ही सभी इंश्योरेंस पॉलिसियों के प्रीमियम अपने आप कम हो जाएंगे। प्रीमियम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करते हैं।
Digital Insurance को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावों में इंश्योरेंस के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। Bima Sugam जैसे मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर और Public Insurance Registry (PIR) के इस्तेमाल को बढ़ाने का प्रस्ताव है।
इससे पॉलिसी खरीदने, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने, पोर्टेबिलिटी और सर्विस से जुड़े कामों को डिजिटल तरीके से आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
अभी सिर्फ प्रस्ताव, अंतिम फैसला बाकी
IRDAI की ओर से पेश किए गए ये बदलाव फिलहाल कंसल्टेशन स्टेज में हैं। हितधारकों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन में कमीशन की पारदर्शिता, मिस-सेलिंग पर निगरानी और डिजिटल सेवाओं को लेकर ग्राहकों के लिए व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।