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महंगाई की चिंता बढ़ी, RBI ने करीब 4 साल बाद बढ़ाया रेपो रेट, वीडियो में जाने कर्ज और EMI महंगी होने के आसार

 

महंगाई के मोर्चे पर बढ़ती चिंता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है। 5 से 7 अक्टूबर तक चली MPC की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नई ब्याज दरों का ऐलान किया।

क्या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक भी अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर बढ़ा सकते हैं।इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI पर पड़ सकता है। महंगे कर्ज की वजह से लोग नया लोन लेने या ज्यादा खर्च करने से बच सकते हैं। मांग और खर्च में कमी आने से महंगाई पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

RBI को क्यों बढ़ानी पड़ी ब्याज दर?

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RBI ने महंगाई के बढ़ते जोखिम को देखते हुए यह कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है, जो पहले 5 फीसदी था। महंगाई के दबाव के पीछे खाद्य और ईंधन की कीमतों के साथ वैश्विक परिस्थितियों और मौसम से जुड़े जोखिम भी अहम माने जा रहे हैं।RBI ने अपनी नीतिगत स्थिति को भी 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए जरूरत पड़ने पर आगे भी सख्त कदम उठा सकता है।

आगे रेपो रेट घटने के आसार कम

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे का नीतिगत कदम परिस्थितियों के आधार पर या तो दर बढ़ाने या उसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का हो सकता है। यानी आने वाले समय में रेपो रेट में कटौती फिलहाल विकल्प नहीं है।

अच्छी खबर भी, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा

महंगाई की चिंता के बीच अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर RBI ने राहत देने वाला अनुमान भी जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है। RBI के मुताबिक घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों से आर्थिक विकास को मजबूती मिल रही है।इस तरह RBI के ताजा फैसले से एक तरफ महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को सख्त किया गया है, वहीं दूसरी तरफ मजबूत आर्थिक विकास की उम्मीद भी जताई गई है। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के बाद आने वाले समय में कर्ज की लागत और EMI पर इसका असर बैंकों की ओर से ब्याज दरों में किए जाने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।