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रूस से तेल खरीद पर भारत का जवाब, वीडियो में निर्मला सीतारमण बोलीं- अचानक आयात बंद करना संभव नहीं; देश की ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम

 

रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले नए कानून के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद अचानक बंद नहीं कर सकता और न ही तुरंत किसी दूसरे सप्लायर पर पूरी तरह निर्भर हो सकता है।मंगलवार को आ योजित ‘बिजनेसलाइन चेंजमेकर अवॉर्ड्स’ कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना है।

ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं फैसले

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निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखता है। उन्होंने कहा कि देश दुनिया के हर उस हिस्से से कच्चा तेल खरीदेगा, जहां से यह आसानी से और उचित शर्तों पर उपलब्ध होगा।वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि तेल खरीद से जुड़े फैसले अचानक नहीं लिए जा सकते, क्योंकि भारत जैसे बड़े देश की ऊर्जा जरूरतें लगातार बनी रहती हैं। किसी एक स्रोत से आयात रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना जरूरी होता है।

अमेरिका ने बनाया नया कानून

रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका ने हाल ही में सख्त कदम उठाया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया था।इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद यह कानून बन गया है। इस कानून के लागू होने के बाद रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त व्यापारिक दबाव पड़ सकता है।

भारत लगातार रख रहा है अपना पक्ष

भारत पहले भी कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद नीतियां देश की जरूरतों और आर्थिक हितों के आधार पर तय होती हैं। सरकार का कहना है कि कच्चे तेल की उपलब्धता, कीमत और आपूर्ति की स्थिरता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते हैं।रूस से कच्चे तेल का आयात पिछले कुछ वर्षों में भारत की ऊर्जा खरीद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना है। वहीं, भारत अन्य देशों से भी तेल आयात करता है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई स्रोतों पर निर्भर रहता है।फिलहाल, अमेरिकी कानून और वैश्विक दबाव के बीच भारत ने संकेत दिया है कि तेल खरीद से जुड़े फैसले देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।