सोलर पैनल बनाने में आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 2047 तक आएगा 8.42 लाख करोड़ का निवेश, 32 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार
भारत आने वाले वर्षों में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी ताकत बन सकता है। देश अब केवल सोलर पैनल लगाने और बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इनके निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रहा है। इसका फायदा यह होगा कि भारत को सोलर पैनल और उनसे जुड़े उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2040 के दशक की शुरुआत तक अपना सालाना सोलर आयात बिल 95 फीसदी से ज्यादा कम कर सकता है।
इतना ही नहीं, इस सेक्टर में 2047 तक करीब 89 अरब डॉलर यानी लगभग 8.42 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इससे देश में 32.3 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की रिपोर्ट 'सोलर मैन्युफैक्चरिंग विजन 2047' में ये अनुमान लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए सरकार को लगातार नीतिगत समर्थन देना होगा और सोलर पैनल के साथ-साथ उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरणों का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाना होगा।
2047 तक कितनी बढ़ जाएगी भारत की सोलर क्षमता?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सोलर बिजली उत्पादन क्षमता में आने वाले वर्षों में जबरदस्त बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल देश की सोलर क्षमता करीब 171-172 गीगावॉट है, जो 2047 तक बढ़कर 2,275 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि, मौजूदा सरकारी नीतियों और योजनाओं के आधार पर यह क्षमता 2047 तक करीब 1,370 गीगावॉट तक ही पहुंच सकती है। यानी सोलर मैन्युफैक्चरिंग विजन को पूरी तरह लागू करने पर भारत की क्षमता मौजूदा अनुमान से काफी ज्यादा हो सकती है।
2030 के आंकड़ों पर नजर डालें तो विजन के तहत भारत की सोलर क्षमता 313 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जबकि मौजूदा नीतियों के हिसाब से इसके 278 गीगावॉट रहने का अनुमान है।
हर साल करना होगा 4.3 अरब डॉलर का निवेश
भारत को सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 से 2047 के बीच हर साल औसतन 4.3 अरब डॉलर का निवेश करना होगा।
इस निवेश का करीब 70 फीसदी हिस्सा सोलर सेल, इनगॉट, वेफर और पॉलीसिलिकॉन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर खर्च होने की संभावना है। ये सभी सोलर पैनल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरण और कच्चे माल हैं।
फिलहाल भारत के पास 233 गीगावॉट से ज्यादा सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता है। वहीं, सोलर सेल निर्माण की क्षमता भी 50 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। देश में इनगॉट और वेफर बनाने की शुरुआती फैक्ट्रियां काम कर रही हैं, जबकि पॉलीसिलिकॉन उत्पादन के लिए भी प्लांट तैयार किए जा रहे हैं।
सोलर सेक्टर में 32.3 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
सोलर मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार के लिहाज से भी बड़ा अवसर बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेक्टर में कुल रोजगार की संख्या मौजूदा करीब 4 लाख से बढ़कर 2030 तक 7.4 लाख और 2047 तक 32.3 लाख हो सकती है।
वहीं, सोलर फैक्ट्रियों में सीधे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी मौजूदा 1.4 लाख से बढ़कर 2047 तक 11.1 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
ISMA के महासचिव अमित मनोहर के मुताबिक, 89 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने, 32 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा करने और आयात पर निर्भरता घटाने की क्षमता घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के महत्व को दर्शाती है।
95 फीसदी से ज्यादा घट सकता है सोलर आयात बिल
भारत के लिए सोलर उपकरणों का आयात कम करना भी बड़ी प्राथमिकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल देश का सालाना सोलर आयात बिल करीब 4.4 अरब डॉलर है। इसे 2040 के दशक की शुरुआत तक 95 फीसदी से ज्यादा कम किया जा सकता है।
इसमें सोलर सेल की भूमिका सबसे अहम होगी। दरअसल, भारत के कुल सोलर आयात बिल में सोलर सेल की हिस्सेदारी करीब 69 फीसदी है। ऐसे में केवल सोलर मॉड्यूल का उत्पादन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। देश को सेल, वेफर, इनगॉट और पॉलीसिलिकॉन जैसे जरूरी उपकरणों का निर्माण भी बड़े स्तर पर करना होगा।
ISMA का अनुमान है कि इस विजन के तहत अगले 10 वर्षों में भारत सोलर मैन्युफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन में घरेलू मांग को पूरा करने की स्थिति में पहुंच सकता है।
दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंचा भारत
भारत में सोलर ऊर्जा का सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। साल 2014 में देश की सोलर बिजली उत्पादन क्षमता 3 गीगावॉट से भी कम थी। वहीं, 2026 के मध्य तक यह बढ़कर करीब 172 गीगावॉट पहुंच गई।
इस शानदार बढ़ोतरी के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पावर उत्पादक देश बन चुका है। देश में बड़े सोलर पार्क, घरों की छतों पर लगाए जा रहे रूफटॉप पैनल और हाइब्रिड प्रोजेक्ट के जरिए सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य सोलर बिजली के इस्तेमाल को बढ़ाकर कोयले और दूसरे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करना है।
सोलर बिजली की कीमत भी हुई कम
सोलर ऊर्जा को तेजी से अपनाने की एक बड़ी वजह इसकी कम लागत भी है। बड़े सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली की कीमत में पिछले वर्षों में काफी गिरावट आई है। यूटिलिटी स्तर के कई सोलर प्रोजेक्ट में बिजली की दर करीब 2 से 2.44 रुपये प्रति यूनिट तक रही है।
कम लागत के कारण बिजली कंपनियों और सरकारों के लिए सोलर ऊर्जा एक बेहतर विकल्प बन रही है। इससे आने वाले समय में सौर ऊर्जा की मांग और बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार की इन योजनाओं से मिल रहा सोलर सेक्टर को बढ़ावा
भारत में सोलर ऊर्जा को घरों, किसानों और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है।
1. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: इस योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाने के लिए सब्सिडी दी जाती है। इसका उद्देश्य देश के करोड़ों परिवारों तक रूफटॉप सोलर सिस्टम पहुंचाना है।
2. पीएम-कुसुम योजना: इस योजना के जरिए किसानों को सोलर पंप लगाने और खेती में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
3. एएलएमएम (ALMM): इसके तहत सरकार सोलर मॉड्यूल बनाने वाली पात्र कंपनियों और उनके उत्पादों की सूची जारी करती है। इससे घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा मिलता है।
4. पीएलआई स्कीम: प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के जरिए सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है।
भारत के सोलर सेक्टर में काम कर रही हैं ये बड़ी कंपनियां
देश में सोलर ऊर्जा और उपकरण निर्माण के कारोबार में कई बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
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अडानी ग्रीन एनर्जी: बड़े स्तर पर सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित करती है। कंपनी के खावड़ा और राजस्थान में बड़े प्रोजेक्ट हैं।
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टाटा पावर सोलर: सोलर पैनल निर्माण, बड़े सोलर प्लांट और घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का काम करती है।
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वारी एनर्जीज: भारत की प्रमुख सोलर मॉड्यूल निर्माता कंपनियों में शामिल है।
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रीन्यू (ReNew): सोलर और दूसरी रिन्यूएबल एनर्जी से बिजली उत्पादन के साथ बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में भी काम कर रही है।
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सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI): यह सरकारी कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने और बिजली खरीद-बिक्री की व्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है।
2047 तक सोलर मैन्युफैक्चरिंग में बदल सकती है भारत की तस्वीर
भारत में सोलर बिजली की बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन क्षमता का विस्तार आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव ला सकता है। अगर सरकार की नीतियों के साथ निजी कंपनियों का निवेश भी इसी तरह बढ़ता रहा, तो भारत सोलर पैनल बनाने के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है।
इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी, लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और भारत वैश्विक सोलर सप्लाई चेन में अपनी मजबूत जगह बना सकेगा। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सोलर सेल से लेकर पॉलीसिलिकॉन तक पूरी उत्पादन श्रृंखला को देश में विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।