भारत बना 'ग्लोबल इकोनॉमिक सुपरपावर': अमेरिका, जापान और यूरोप को पछाड़ 6.7% की स्पीड से दौड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम यानी WEF के चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.7 प्रतिशत रह सकती है।रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग को बताया गया है। WEF के सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा मई के मुकाबले बढ़ा है।
भारत की ग्रोथ पर बढ़ा भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 74 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है। मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था।
वहीं, 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम मध्यम स्तर या उससे बेहतर रह सकती है।
WEF का Chief Economists' Outlook अलग-अलग क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार और मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों को लेकर विशेषज्ञों की राय पर आधारित होता है।
रोजगार को लेकर क्या है अनुमान?
रोजगार के मोर्चे पर विशेषज्ञों की राय अपेक्षाकृत स्थिर है। करीब 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
वहीं, 17 प्रतिशत विशेषज्ञ बेरोजगारी बढ़ने की आशंका जताते हैं, जबकि 13 प्रतिशत को इसमें कमी आने की उम्मीद है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 5 प्रतिशत रही।
महंगाई को लेकर भी बदली तस्वीर
महंगाई के मोर्चे पर भी मई के मुकाबले विशेषज्ञों की चिंता कुछ कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 12 महीनों में 55 प्रतिशत अर्थशास्त्री मध्यम स्तर की महंगाई की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 45 प्रतिशत को महंगाई ऊंची रहने की आशंका है।
महंगाई को लेकर यह अनुमान ऐसे समय आया है जब भारत में कीमतों पर घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारकों का असर बना हुआ है।
ब्याज दरों में बड़े बदलाव की उम्मीद कम
मौद्रिक नीति को लेकर भी ज्यादातर विशेषज्ञों को अगले 12 महीनों में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। करीब 67 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ब्याज दरों से जुड़ी नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
वहीं, 24 प्रतिशत विशेषज्ञों को मौद्रिक नीति के और सख्त होने की संभावना दिखाई देती है।
राजकोषीय नीति के मामले में भी 72 प्रतिशत विशेषज्ञों को बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
7.8% GDP ग्रोथ ने बढ़ाया भरोसा
WEF के अनुमान के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 7.8 प्रतिशत की GDP ग्रोथ दर्ज की। यह आंकड़ा उम्मीदों से बेहतर रहा और निवेश, मैन्युफैक्चरिंग तथा कुछ सर्विस सेक्टर की मजबूती से इसे सहारा मिला।
इस मजबूत प्रदर्शन के बाद कई संस्थानों ने भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान में बदलाव किया है। Moody’s ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती को इसके पीछे प्रमुख वजहों में शामिल किया।
घरेलू मांग बनी बड़ी ताकत
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए घरेलू खपत और मांग महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। WEF के आकलन में भी घरेलू मांग को भारत की आर्थिक मजबूती की प्रमुख वजहों में गिना गया है।
हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितता, ऊर्जा की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसे जोखिम अभी भी मौजूद हैं। इसलिए GDP के मौजूदा मजबूत आंकड़ों के बावजूद आगे की आर्थिक वृद्धि कई घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, WEF के अर्थशास्त्रियों का आकलन और हालिया 7.8% GDP आंकड़ा भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत गतिविधियों की तस्वीर पेश करता है, जबकि आगे के लिए वैश्विक जोखिमों पर भी नजर बनी रहेगी।