मध्य पूर्व युद्ध का असर, भारत में फर्टिलाइजर उत्पादन मार्च में 24.6% घटा, फुटेज में देखें क्या कारण हैं और इसका देश पर क्या होगा असर
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई देने लगा है, जिसका सीधा प्रभाव भारत के उर्वरक (फर्टिलाइजर) उत्पादन पर भी पड़ा है। वाणिज्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का फर्टिलाइजर उत्पादन पिछले वर्ष मार्च 2025 की तुलना में लगभग 24.6 प्रतिशत गिर गया है।
सरकारी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गिरावट की प्रमुख वजह प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) की सप्लाई में बाधा है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से यूरिया उत्पादन में किया जाता है। यूरिया भारत की कृषि व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में से एक है, और इसका उत्पादन सीधे तौर पर गैस आपूर्ति और कीमतों पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर होर्मुज जलमार्ग (Hormuz Route) में तनावपूर्ण हालात के चलते तेल और गैस की आवाजाही काफी हद तक बाधित हुई है। यह वही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया की बड़ी मात्रा में ऊर्जा और कच्चे माल का परिवहन होता है।
भारत की फर्टिलाइजर इंडस्ट्री काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई बाधित होती है या कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, तो इसका सीधा असर घरेलू उत्पादन पर पड़ता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फर्टिलाइजर उत्पादन में गिरावट आने से आने वाले समय में कृषि लागत पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर खरीफ सीजन से पहले यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो किसानों को खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्थिति पर नजर रखी जा रही है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसके अलावा ऊर्जा आयात को विविध बनाने और दीर्घकालिक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत की कृषि और ऊर्जा व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है, और आने वाले महीनों में इसका प्रभाव और भी व्यापक हो सकता है।