ईरान संकट का भारत पर असर, वीडियो में देखें तेल, शेयर बाजार और सोने-चांदी की कीमतों में उछाल की आशंका
अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। यदि यह जंग लंबी चलती है और रणनीतिक तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
भारत क्यों है ज्यादा प्रभावित?
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब 50% सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है। यदि ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है या वहां सैन्य तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक आपूर्ति बाधित हो सकती है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि सप्लाई में कमी आने पर इसकी कीमत 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित उछाल
अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होती है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। अनुमान है कि पेट्रोल की कीमत 95 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 105 रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं डीजल 88 रुपये से बढ़कर 96 रुपये प्रति लीटर तक जा सकता है। इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
शेयर बाजार पर असर
तेल की कीमतों में उछाल का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। आयात लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आएगा। एविएशन, पेंट, केमिकल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। विदेशी निवेशक भी अनिश्चितता के माहौल में बिकवाली कर सकते हैं, जिससे बाजार में गिरावट की संभावना है।
सोना-चांदी में रिकॉर्ड तेजी?
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं चांदी, जो फिलहाल करीब 2.67 लाख रुपये प्रति किलो है, 3.50 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति कूटनीतिक स्तर पर संभल जाती है और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहता है, तो बाजार स्थिर रह सकता है। लेकिन यदि ईरान ने समुद्री मार्ग को बंद करने जैसा बड़ा कदम उठाया, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
फिलहाल भारत सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की रणनीति पर भी काम किया जा सकता है। आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति ही तय करेगी कि भारत की जेब पर कितना बोझ बढ़ेगा।