HUL Price Hike: सर्फ एक्सेल, व्हील और रिन के दाम फिर बढ़े, जानें अब कितने में मिलेगा डिटर्जेंट
महंगाई के बीच रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने अपने लोकप्रिय डिटर्जेंट ब्रांड व्हील, सर्फ एक्सेल और रिन के कई पैक्स के दाम अक्टूबर में बढ़ा दिए हैं। अलग-अलग उत्पादों की कीमतों में करीब 2.2% से 7.1% तक की बढ़ोतरी की गई है।
खास बात यह है कि इन डिटर्जेंट की कीमतों में इस साल पहले भी कई बार इजाफा हो चुका है। ऐसे में नई कीमतों का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
Wheel से Surf Excel तक महंगा हुआ डिटर्जेंट
HUL ने व्हील पाउडर के 1 किलो पैक की कीमत 90 रुपये से बढ़ाकर 93 रुपये कर दी है। वहीं 500 ग्राम पैक अब 46 रुपये की जगह 47 रुपये में मिलेगा।
इसी तरह Surf Excel Easy Wash के 1 किलो पैक की कीमत 167 रुपये से बढ़कर 172 रुपये हो गई है। 500 ग्राम पैक के लिए अब ग्राहकों को 85 रुपये के बजाय 87 रुपये खर्च करने होंगे।
Rin के पैकेट की कीमत भी बढ़ी
Rin के 500ml पैक की कीमत 90 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये कर दी गई है। वहीं Rin पाउडर के 1 किलो पैक की कीमत अब 123 रुपये हो गई है, जो पहले 120 रुपये थी।
500 ग्राम Rin पाउडर के लिए भी अब 61 रुपये के बजाय 63 रुपये चुकाने होंगे।
इस साल कई बार बढ़ाए जा चुके हैं दाम
डिटर्जेंट की कीमतों में यह बढ़ोतरी इस साल पहली बार नहीं हुई है। HUL पहले भी व्हील की कीमत में कई बार इजाफा कर चुका है। Surf Excel के दाम में भी इस साल करीब 11 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं Rin के अलग-अलग पैक्स भी महंगे हुए हैं।
लगातार कीमत बढ़ने से उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की खरीदारी पर पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
घर के बजट पर पड़ेगा सीधा असर
व्हील, Rin और Surf Excel जैसे डिटर्जेंट बड़ी संख्या में घरों में नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में इनके दाम बढ़ने का असर मासिक घरेलू खर्च पर पड़ सकता है। खासतौर पर बड़े पैक खरीदने वाले परिवारों का बजट इससे प्रभावित होगा।
कच्चे माल की बढ़ी लागत बनी वजह
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक डिटर्जेंट की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कच्चे माल और पैकेजिंग की लागत बढ़ना प्रमुख कारण है। पाम ऑयल की कीमतों में करीब 20-30 फीसदी तक वृद्धि बताई जा रही है। वहीं पैकेजिंग लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भी उत्पादन और परिवहन लागत पर पड़ रहा है। इन बढ़ती लागतों के बीच कंपनियों की ओर से उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है।