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AI की हैकिंग ताकत देखकर कांपे गूगल के वैज्ञानिक! बोले— 'इंसानी नस्ल का अंत तय, अगर तुरंत एक्शन नहीं लिया'

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी सामने आई है। Google DeepMind के पूर्व वैज्ञानिक बिलाल चुगताई ने दावा किया है कि भविष्य में AI इतनी शक्तिशाली हो सकती है कि वह पूरी मानव जाति के लिए खतरा बन जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस संभावित खतरे को रोकने के लिए दुनिया के पास ज्यादा समय नहीं बचा है।

बिलाल ने Google DeepMind से इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर AI के भविष्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि AI जिस तेजी से विकसित हो रही है, उसे देखते हुए कंपनियों और सरकारों को अभी से सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

AI से इंसानों को दो बड़े खतरे

बिलाल के मुताबिक AI के तेजी से विकास के साथ कम से कम दो बड़े खतरे सामने आ सकते हैं।

1. AI पर इंसानों का कंट्रोल खत्म होने का डर

फिलहाल AI सिस्टम इंसानों के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। लेकिन भविष्य में अगर AGI यानी Artificial General Intelligence जैसी तकनीक विकसित होती है, जो इंसानों की तरह अलग-अलग क्षेत्रों में सोच और समस्या हल करने में सक्षम हो, तो स्थिति बदल सकती है।

बिलाल का डर है कि अगर मशीनें इंसानों से कहीं ज्यादा बुद्धिमान हो गईं, तो उन्हें नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में इंसानों के लिए यह तय करना कठिन हो सकता है कि AI किस तरह और किन उद्देश्यों के लिए काम करे।

हालांकि, यह अभी एक संभावित भविष्य का खतरा है और विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि ऐसी स्थिति कब या क्या वास्तव में संभव होगी।

2. स्वायत्त हथियारों का खतरा

दूसरा बड़ा खतरा स्वायत्त हथियारों से जुड़ा है। इनमें ऐसे ड्रोन या हथियार शामिल हो सकते हैं, जो किसी इंसान के सीधे आदेश के बिना लक्ष्य की पहचान करके कार्रवाई करने में सक्षम हों।

अगर ऐसी तकनीक का गलत इस्तेमाल हुआ या सिस्टम ने गलत निर्णय लिया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यही वजह है कि AI आधारित हथियारों को लेकर दुनिया भर में सुरक्षा और नैतिक सवाल उठ रहे हैं।

बिलाल बोले- AI की रफ्तार चिंता बढ़ा रही है

बिलाल चुगताई Google DeepMind की उस टीम से जुड़े रहे हैं, जिसका काम AI को सुरक्षित और इंसानों के हित में विकसित करने से जुड़ा था।

अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने AI को बेहद करीब से विकसित होते देखा है। उनके मुताबिक तकनीक की प्रगति जिस रफ्तार से हो रही है, वह चिंता पैदा करने वाली है।

उन्होंने आशंका जताई कि AI कंपनियां आने वाले समय में ऐसे सिस्टम तैयार कर सकती हैं, जो इंसानों की क्षमता से कहीं आगे निकल जाएं। ऐसे में AI को नियंत्रित करने और सुरक्षित रखने की चुनौती भी बढ़ सकती है।

कुछ ही सालों में AI में आया बड़ा बदलाव

बिलाल ने AI के विकास की गति का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने 2022 में इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया था, तब AI सिस्टम आज की तुलना में काफी सीमित थे। लेकिन कुछ ही वर्षों में AI ने कई ऐसे काम करना शुरू कर दिए हैं, जिन्हें पहले इंसानों की विशेष क्षमता माना जाता था।

AI अब कोडिंग, रिसर्च, गणित, लेखन और डेटा विश्लेषण जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से सक्षम हो रही है। इसी वजह से विशेषज्ञों के बीच यह बहस भी तेज हुई है कि AI का विकास किस गति से और किन सुरक्षा नियमों के तहत होना चाहिए।

AI कंपनियों की रेस पर उठ रहे सवाल

बिलाल का मानना है कि AI को सुरक्षित तरीके से विकसित करना अभी भी संभव है। लेकिन इसके लिए दुनिया की बड़ी AI कंपनियों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना होगा।

उनके मुताबिक कंपनियों के बीच सबसे शक्तिशाली और सबसे तेज AI बनाने की होड़ को नियंत्रित करने की जरूरत है। AI के विकास की गति ऐसी होनी चाहिए जिसे समाज और सरकारें समझ सकें और जिसके संभावित जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की जा सके।

Anthropic CEO भी धीमी रफ्तार के पक्ष में

AI कंपनी Anthropic के CEO डारियो अमोदेई भी AI विकास की रफ्तार और इससे जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उनका तर्क है कि अगर AI के विकास को कुछ हद तक नियंत्रित गति से आगे बढ़ाया जाए, तो वैज्ञानिकों और सरकारों को संभावित खतरों को समझने तथा सुरक्षा उपाय तैयार करने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है।

AI की सुरक्षा को लेकर तकनीकी कंपनियों और विशेषज्ञों के बीच यह बहस लगातार बढ़ रही है कि नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

ट्रंप का तर्क- ज्यादा नियमों से चीन आगे निकल सकता है

AI को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख कई AI सुरक्षा विशेषज्ञों से अलग है। वह AI क्षेत्र में अत्यधिक सरकारी पाबंदियों के पक्ष में नहीं हैं।

ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ने अपनी AI कंपनियों पर बहुत ज्यादा नियम और प्रतिबंध लगा दिए, तो चीन इस तकनीकी दौड़ में आगे निकल सकता है। उनके मुताबिक AI की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भविष्य की आर्थिक और रणनीतिक ताकत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यही वजह है कि एक तरफ AI की रफ्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इसके संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि AI को तेजी से विकसित भी किया जाए और साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में यह तकनीक इंसानों के नियंत्रण से बाहर न हो।