Gold Smuggling: धनतेरस पर सस्ता सोना खरीदने के लिए बढ़ा लोगों का रुझान, हर 10 में से 3 खरीदार चुनेंगे बिना बिल वाला रास्ता; इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से बढ़ी तस्करी
धनतेरस पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है, लेकिन इस बार सोने की रिकॉर्ड कीमतों और बढ़े हुए टैक्स ने ग्राहकों की खरीदारी का तरीका बदलना शुरू कर दिया है। महंगे सोने से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग अब ऐसे रास्तों से सोना खरीदने पर विचार कर रहे हैं, जहां उन्हें बाजार से कम कीमत चुकानी पड़े। LocalCircles के एक सर्वे में चौंकाने वाली बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे करीब 29 फीसदी लोग पक्के बिल वाले ज्वेलर के बजाय अनौपचारिक माध्यमों से सोना खरीदना चाहते हैं।
यानी हर 10 में से लगभग 3 खरीदार सस्ता सोना पाने के लिए अनौपचारिक बाजार का रुख कर सकते हैं। इसकी एक बड़ी वजह सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी का 6 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी होना बताया जा रहा है। इससे आधिकारिक तरीके से आयात किए गए सोने और अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले सोने की कीमतों के बीच अंतर बढ़ा है। आइए जानते हैं कि सोने की तस्करी क्यों बढ़ रही है और इसका भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ रहा है।
हर 10 में से करीब 3 लोग बिना पक्के बिल के खरीदेंगे सोना
LocalCircles के सर्वे में उन लोगों से सवाल पूछा गया था, जो 6 नवंबर को धनतेरस के मौके पर सोना खरीदने की योजना बना रहे थे। इसमें 29 फीसदी लोगों ने कहा कि वे कम कीमत मिलने पर अनौपचारिक माध्यमों से सोना खरीदना पसंद करेंगे।
वहीं, 71 फीसदी लोगों ने साफ किया कि वे पक्का बिल देने वाले ज्वेलर से ही सोने की खरीदारी करेंगे। इस सवाल के जवाब में कुल 21,651 लोगों ने अपनी राय दी।
यह सर्वे देश के 312 जिलों में किया गया था। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं से 42 हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं। सभी जवाब LocalCircles के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुटाए गए।
सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से क्यों बढ़ी तस्करी?
सोने की तस्करी बढ़ने के पीछे इंपोर्ट ड्यूटी में हुई बढ़ोतरी को एक अहम वजह माना जा रहा है। सरकार ने 13 मई 2026 को सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।
इस फैसले का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत करना और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था। हालांकि, इसका दूसरा असर यह हुआ कि आधिकारिक तरीके से आयात किए गए सोने की लागत बढ़ गई।
जब सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी के साथ अन्य टैक्स और खर्च भी जुड़ते हैं, तो आधिकारिक बाजार में इसकी कीमत बढ़ जाती है। दूसरी तरफ तस्करी के जरिए आने वाला सोना इन शुल्कों से बचकर बाजार में अपेक्षाकृत सस्ता बिक सकता है।
इसी कीमत के अंतर का फायदा उठाकर अनौपचारिक बाजार में सोने की खरीद-बिक्री बढ़ने लगी है।
सिर्फ 3 महीने में अनौपचारिक तरीके से आया करीब 50 टन सोना
भारत में सोने की तस्करी कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की Q3 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट से लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच भारत में अनौपचारिक तरीके से आने वाले सोने की मात्रा सालाना आधार पर 1,500 फीसदी से ज्यादा बढ़कर करीब 50 टन हो गई।
इसकी तुलना में पिछले साल इसी अवधि के दौरान अनौपचारिक तरीके से करीब 3 टन सोना आया था।
वहीं, आधिकारिक रास्ते से भारत में सोने का नेट इंपोर्ट 46 फीसदी घटकर 114.1 टन रह गया। ये आंकड़े बताते हैं कि सोने की ऊंची कीमतों और आयात शुल्क का असर देश के आधिकारिक गोल्ड मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है।
सोने की तस्करी रोकने के लिए क्या चाहते हैं लोग?
LocalCircles के सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि भारत में तस्करी के सोने की बिक्री रोकने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए।
इस सवाल पर लोगों की राय कुछ इस तरह सामने आई:
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37 फीसदी लोग: सोने की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं।
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29 फीसदी लोग: सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं।
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17 फीसदी लोग: तस्करी का सोना बेचने वाले कारोबारियों पर सख्ती चाहते हैं।
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12 फीसदी लोग: सख्त कार्रवाई के साथ आयात नीति में बदलाव के पक्ष में हैं।
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5 फीसदी लोग: बिना बिल सोना खरीदने के नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं।
इस सवाल पर कुल 20,471 लोगों ने जवाब दिया। सर्वे के मुताबिक, करीब 66 फीसदी लोग तस्करी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो कार्रवाई के साथ नीतिगत बदलाव चाहते हैं।
क्या सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी फिर 6% हो सकती है?
सोने की तस्करी और आधिकारिक बाजार में घटती मांग को देखते हुए बुलियन कारोबारियों और ज्वेलर्स की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी कम करने की मांग की जा रही है।
अगस्त 2026 में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि सरकार सोने पर आयात शुल्क को दोबारा 6 फीसदी करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, 4 नवंबर 2026 तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया था।
ज्वेलरी कारोबारियों का मानना है कि अगर इंपोर्ट ड्यूटी कम होती है तो आधिकारिक और अनौपचारिक बाजार के बीच कीमतों का अंतर घट सकता है। इससे तस्करी के जरिए आने वाले सोने का आकर्षण भी कम हो सकता है।
महंगे सोने ने घटाई भारत में खरीदारी, 29% गिर गई मांग
सोने की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय ग्राहकों की खरीदारी पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 टन रह गई।
इस दौरान अलग-अलग कैटेगरी में मांग की स्थिति इस प्रकार रही:
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गोल्ड ज्वेलरी: मांग 20 फीसदी घटकर 99.9 टन रह गई।
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गोल्ड बार और सिक्के: मांग में 40 फीसदी की गिरावट आई और यह 55 टन रह गई।
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कुल सोने की मांग: सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 टन रही।
यानी ऊंची कीमतों के कारण लोगों ने सोने के गहने, सिक्के और बार खरीदने में पहले के मुकाबले कम दिलचस्पी दिखाई।
कम सोना खरीदकर भी लोगों ने खर्च किए ज्यादा पैसे
सोने की मांग में गिरावट के बावजूद इसकी कुल वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। WGC के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग की कुल कीमत सालाना आधार पर 3 फीसदी बढ़कर करीब 2.42 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।
इसका सीधा मतलब है कि लोगों ने वजन के हिसाब से कम सोना खरीदा, लेकिन सोने की कीमतें ज्यादा होने के कारण उन्हें खरीदारी के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़े।
सस्ता सोना खरीदने के चक्कर में ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
धनतेरस और शादी के सीजन में सोना खरीदते समय कम कीमत का ऑफर देखकर जल्दबाजी करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर बिना बिल या अनौपचारिक माध्यम से मिलने वाले सोने में शुद्धता, असली स्रोत और भविष्य में दोबारा बेचने से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
ग्राहकों को सोना खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
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हमेशा विश्वसनीय और पंजीकृत ज्वेलर से खरीदारी करें।
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सोने की शुद्धता और हॉलमार्क की जांच करें।
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खरीदारी का पक्का बिल जरूर लें।
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सोने का वजन, कैरेट और मेकिंग चार्ज बिल में स्पष्ट देखें।
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बाजार भाव से असामान्य रूप से कम कीमत पर मिलने वाले सोने से सावधान रहें।
कुल मिलाकर, इस धनतेरस पर सोने की बढ़ती कीमतें और इंपोर्ट ड्यूटी का असर बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। एक तरफ आधिकारिक बाजार में सोने की मांग घट रही है, तो दूसरी तरफ सस्ता सोना मिलने की उम्मीद में अनौपचारिक बाजार की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर है कि क्या सोने की इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की जाएगी या तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।