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कमाई का नया ठिकाना बने Gold-Silver ETF! रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निवेश, जानें क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड

 

भारत में सोने में निवेश करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग सोने के गहने और सिक्के खरीदना पसंद करते थे, वहीं अब डिजिटल गोल्ड और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) जैसे विकल्पों की ओर भी निवेशकों का रुझान बढ़ रहा है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत में गोल्ड ETF की कुल संपत्ति सालाना आधार पर 164 फीसदी बढ़कर करीब 1.91 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। एक साल पहले यह आंकड़ा लगभग 72,500 करोड़ रुपये था।सोने के साथ-साथ चांदी और अन्य कमोडिटी में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। वहीं, जोखिम को अलग-अलग एसेट में बांटने के लिए मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड भी निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।

सोने और चांदी में क्यों बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी?

निवेशक अब सोने और चांदी को केवल बाजार में गिरावट के दौरान सुरक्षा देने वाले विकल्प के रूप में नहीं देख रहे हैं। पोर्टफोलियो में विविधता लाने, जोखिम को संतुलित करने और जरूरत पड़ने पर निवेश को भुनाने की सुविधा के लिए भी इन एसेट्स को महत्व दिया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत सोने के लिए मजबूत रही और शुरुआती दो महीनों में सोने ने 11 नए रिकॉर्ड स्तर छुए। हालांकि, सोने की कीमतों में तेजी के साथ उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है।

चांदी में निवेश का रुझान भी बढ़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त 2026 तक भारत में सिल्वर ETF की कुल संपत्ति करीब 85,000 से 86,000 करोड़ रुपये के बीच पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब कीमती धातुओं में निवेश के लिए पारंपरिक खरीदारी के अलावा वित्तीय उत्पादों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या होता है Gold ETF?

गोल्ड ETF ऐसा निवेश विकल्प है, जिसके जरिए निवेशक सीधे सोने के गहने या सिक्के खरीदे बिना सोने की कीमतों से जुड़ा निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आम तौर पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है।

इसके कुछ प्रमुख फायदे हैं:

  • शुद्धता की चिंता कम: निवेशक को खुद सोने की शुद्धता जांचने या गहने बनवाने की जरूरत नहीं होती।

  • स्टोरेज की परेशानी नहीं: घर में भौतिक सोना रखने और उसकी सुरक्षा की चिंता कम हो जाती है।

  • बाजार में खरीद-बिक्री: बाजार के कारोबारी समय में ETF की यूनिट्स खरीदी और बेची जा सकती हैं।

  • पोर्टफोलियो में विविधता: निवेशक अपने कुल निवेश का एक हिस्सा सोने से जुड़े उत्पादों में रख सकते हैं।

हालांकि, Gold ETF में भी बाजार जोखिम होता है। इसकी कीमत सोने के बाजार भाव के अनुसार घट-बढ़ सकती है और निवेश से रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक की मांग भी बढ़ी

कमोडिटी बाजार में बदलाव केवल सोने और चांदी तक सीमित नहीं है। तांबा (Copper), एल्युमीनियम और जस्ता (Zinc) जैसे औद्योगिक धातुओं की मांग भी बढ़ रही है।

देश में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन के विस्तार से इन धातुओं की जरूरत बढ़ रही है। बिजली के नेटवर्क, इलेक्ट्रिक वाहनों, ऊर्जा प्रणालियों और निर्माण क्षेत्र में इनका महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है।

इन धातुओं की कीमतों पर वैश्विक मांग, औद्योगिक उत्पादन, खनन, सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की परिस्थितियों का असर पड़ता है। इसलिए इनमें निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति और जोखिम को समझना जरूरी है।

युवाओं की पसंद में बदलाव, गहनों से आगे बढ़ रहे निवेश के विकल्प

सोने की मांग में बदलाव के पीछे युवा उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं को भी एक वजह माना जा रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल से जुड़ी शीला कुलकर्णी के अनुसार, अब कुछ युवा भारी-भरकम गहनों के बजाय हल्के आभूषण पसंद कर रहे हैं। साथ ही, वे अपनी आय का हिस्सा यात्रा, अनुभवों और दूसरी जरूरतों पर भी खर्च कर रहे हैं।

इस बदलाव के बीच डिजिटल गोल्ड और Gold ETF जैसे निवेश विकल्प लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। हालांकि, गहने खरीदने का उद्देश्य अक्सर इस्तेमाल या पारिवारिक परंपरा होता है, जबकि ETF का इस्तेमाल मुख्य रूप से निवेश के लिए किया जाता है। इसलिए दोनों की तुलना करते समय उनके उद्देश्य और लागत को अलग-अलग समझना चाहिए।

यह भी ध्यान रखें कि डिजिटल गोल्ड और Gold ETF एक जैसे उत्पाद नहीं हैं। डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, नियामकीय स्थिति, शुल्क और निकासी की शर्तें जांचना जरूरी है।

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में भी बढ़ा निवेश

निवेश में विविधता लाने के लिए मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड भी लोगों की पसंद बन रहे हैं। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में इन फंड्स की कुल संपत्ति 2.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई, जो एक साल पहले की तुलना में करीब 57 फीसदी ज्यादा है।

रिपोर्ट में इस श्रेणी में लगातार 60 महीनों से सकारात्मक निवेश प्रवाह दर्ज होने की बात भी कही गई है।

मल्टी-एसेट फंड आम तौर पर शेयर, डेट और सोने जैसी अलग-अलग परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। इसका उद्देश्य निवेश को एक ही एसेट पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में बांटना होता है। हालांकि, विविधता होने के बावजूद इन फंड्स में नुकसान की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती।

कमोडिटी बाजार में ब्रोकिंग कंपनियों की भूमिका भी बदल रही

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के ब्रोकिंग कारोबार के सीईओ राहुल रेगे के मुताबिक, कमोडिटी बाजार के विस्तार के साथ ब्रोकिंग कंपनियों की भूमिका भी बदल रही है। निवेशक अब केवल खरीद-बिक्री की सुविधा नहीं, बल्कि अलग-अलग एसेट में निवेश और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी चाहते हैं।

ऐसे में निवेश सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए निवेशकों को उत्पादों की विशेषताओं, संभावित जोखिमों और पोर्टफोलियो में विविधता के बारे में जानकारी देना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

निवेश करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

सोना, चांदी, औद्योगिक धातुओं और मल्टी-एसेट फंड में निवेश के अलग-अलग फायदे और जोखिम हैं। निवेश का विकल्प चुनने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • अपने निवेश का उद्देश्य और समयावधि तय करें।

  • केवल हालिया तेजी देखकर किसी एसेट में बड़ी रकम निवेश न करें।

  • Gold ETF में ब्रोकरेज, फंड के खर्च और बाजार में खरीद-बिक्री की सुविधा समझें।

  • डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले प्लेटफॉर्म की शर्तें और जोखिम जांचें।

  • चांदी और औद्योगिक धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है।

  • अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार निवेश करें।

कुल मिलाकर, भारतीय निवेशकों के बीच सोने और अन्य परिसंपत्तियों में निवेश के तरीके बदल रहे हैं। Gold ETF, Silver ETF और मल्टी-एसेट फंड जैसे विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता इस बदलाव को दिखाती है। हालांकि, निवेश का फैसला केवल बाजार के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।