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सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट: आज सोना ₹2,282 और चांदी ₹1,264 टूटी, खरीदारों के लिए सुनहरा मौका

 

दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। त्योहारों के सीजन में जहां आमतौर पर सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है, वहीं इस बार सर्राफा बाजार में कीमतें नीचे आ रही हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 2,282 रुपये गिरकर 1.38 लाख रुपये पर आ गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत में भी 1,264 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी 1.80 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है।इससे पहले पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सोना करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 1.81 लाख रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। लगातार गिरावट के कारण सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को राहत मिल सकती है।

अक्टूबर में सोना ₹8,084 और चांदी ₹39,485 तक सस्ती

अक्टूबर महीने में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 10 ग्राम सोना 8,084 रुपये सस्ता हुआ, जबकि एक किलो चांदी के भाव में 39,485 रुपये की कमी आई।

1 अक्टूबर 2026 को एक किलो चांदी की कीमत करीब 2.20 लाख रुपये थी। वहीं, 10 ग्राम सोना लगभग 1.48 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा था। महीने के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा।

सोने की कीमतों में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

1. ऊंचे भाव पर निवेशकों की मुनाफावसूली

त्योहारों से पहले सोने की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसे में बड़े निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोने की बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में बिक्री बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया और सोने के भाव नीचे आने लगे।

2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर डॉलर की चाल का सीधा असर पड़ता है। जब अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड मजबूत होते हैं, तो निवेशकों के लिए सोने में निवेश की आकर्षकता कम हो सकती है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।

3. महंगे भाव के कारण खरीदारी में कमी

सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने के बाद आम खरीदारों ने भी खरीदारी में सावधानी बरतनी शुरू कर दी। कई ग्राहक कीमतों में और गिरावट का इंतजार कर रहे हैं। मांग कमजोर होने से बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

चांदी के दाम गिरने के पीछे ये 3 कारण

1. औद्योगिक मांग में कमजोरी

चांदी का इस्तेमाल केवल गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आने पर उद्योगों की मांग प्रभावित हो सकती है। इसका असर चांदी की कीमतों पर भी पड़ता है।

2. बाजार में बिकवाली का दबाव

शेयर और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बड़े ट्रेडर्स और निवेशक अपनी पोजीशन कम कर सकते हैं। चांदी में बिकवाली बढ़ने से इसकी कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

3. सोने की कीमतों में गिरावट का असर

सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर कई बार एक-दूसरे का असर देखने को मिलता है। जब सोने के भाव में बड़ी गिरावट आती है, तो निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है और चांदी में भी बिकवाली बढ़ सकती है।

क्या आगे भी जारी रहेगी सोने-चांदी की गिरावट?

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी में निवेश करने वालों को एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करनी चाहिए। यानी कुछ खरीदारी अभी की जा सकती है और बाकी रकम को 15 से 20 दिन के अंतराल पर निवेश किया जा सकता है।

उनकी सलाह के मुताबिक, सोने-चांदी को केवल एक-दो महीने के नजरिए से खरीदने के बजाय 6 महीने से एक साल तक के निवेश के हिसाब से देखना बेहतर हो सकता है। हालांकि, कीमतों में आगे कितनी गिरावट या तेजी आएगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल और मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग क्यों होते हैं?

देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत एक जैसी नहीं होती। इसके पीछे कई स्थानीय और व्यावसायिक कारण होते हैं।

  • ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा का खर्च: एक शहर से दूसरे शहर तक सोना पहुंचाने में परिवहन, बीमा और सुरक्षा से जुड़े खर्च शामिल होते हैं। इसका असर स्थानीय कीमतों पर पड़ सकता है।

  • स्थानीय मांग और खरीदारी: अलग-अलग राज्यों और शहरों में सोने की मांग अलग होती है। ज्यादा मांग वाले बाजारों में खरीदारी और सप्लाई का गणित कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

  • स्थानीय ज्वेलर्स एसोसिएशन: कई जगह स्थानीय सर्राफा संगठन बाजार की मांग और सप्लाई के हिसाब से अपने रेट जारी करते हैं।

  • ज्वेलर्स के पुराने स्टॉक की कीमत: दुकानदारों ने जिस कीमत पर सोना खरीदा होता है, उसका असर भी ग्राहकों को मिलने वाले बिक्री भाव पर पड़ सकता है।

ऑल टाइम हाई से चांदी ₹2.06 लाख और सोना ₹38 हजार सस्ता

इस साल सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को इसकी कीमत बढ़कर 3.86 लाख रुपये के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। अब इस ऊंचे स्तर से चांदी करीब 2.06 लाख रुपये सस्ती बताई जा रही है।

इसी तरह, 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपये थी। 29 जनवरी 2026 को इसका भाव बढ़कर 1.76 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मौजूदा कीमतों के आधार पर सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 38 हजार रुपये नीचे आ चुका है।

सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

1. BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें

सोने के गहने खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क की जांच करें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। गहने पर हॉलमार्किंग से जुड़ा HUID नंबर भी जरूर जांचें। केवल दुकानदार की बात पर भरोसा करने के बजाय उसकी प्रमाणिकता की पुष्टि करें।

2. खरीदारी से पहले कीमत की जांच करें

सोना खरीदने से पहले उस दिन का बाजार भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से चेक करें। IBJA की वेबसाइट पर जारी रेट से भी कीमत का मिलान किया जा सकता है। ध्यान रखें कि 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। इसके अलावा ज्वेलरी की कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी जुड़ सकते हैं।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

1. मैग्नेट टेस्ट: शुद्ध चांदी आमतौर पर चुंबक से आकर्षित नहीं होती। हालांकि, केवल इस टेस्ट के आधार पर चांदी की शुद्धता तय नहीं की जा सकती।

2. आइस टेस्ट: चांदी गर्मी की अच्छी सुचालक होती है। इसके संपर्क में रखी बर्फ सामान्य परिस्थितियों में तेजी से पिघल सकती है। यह केवल शुरुआती जांच का तरीका है।

3. स्मेल टेस्ट: शुद्ध चांदी में आमतौर पर कोई खास धातु जैसी गंध नहीं होती। हालांकि, गंध के आधार पर असली और नकली चांदी की पक्की पहचान करना संभव नहीं है।

4. क्लॉथ टेस्ट: चांदी को मुलायम सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी काले रंग का निशान आ सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली प्रतिक्रिया के कारण होता है, लेकिन इससे भी शुद्धता की अंतिम पुष्टि नहीं होती।