Gold Price Crash: सोने की कीमतों में फिर बड़ी गिरावट, जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचा भाव; जानें क्या हैं वजहें
सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना शुक्रवार को करीब 1% टूटकर 3,980.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। कारोबार के दौरान कीमतें 17 जुलाई के बाद के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गईं। भारत में भी सोने का भाव करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
इससे पहले अगस्त और सितंबर में सोने की कीमतों में सुधार हुआ था और भाव करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए थे। लेकिन अब बाजार में दोबारा दबाव देखने को मिल रहा है। दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई और यह 3,991.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
अक्टूबर में लगातार दूसरे महीने गिरा सोना
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 4.3% की गिरावट आ चुकी है। इससे पहले सितंबर में भी सोने के भाव नीचे आए थे। लगातार दो महीनों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या चीन की नीतियों का पड़ रहा है असर?
सोने की कीमतों में गिरावट की एक संभावित वजह चीन की नई निवेश नीतियों को भी माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में विदेशी निवेश और ऑफशोर ट्रस्ट से जुड़े नियमों को सख्त किया गया है। इससे कुछ निवेशकों पर नकदी जुटाने और संभावित वित्तीय देनदारियों को पूरा करने का दबाव बढ़ सकता है।
स्विस वेल्थ मैनेजमेंट फर्म जूलियस बेयर की मार्केट कमेंट्री के मुताबिक, चीन में कुछ निवेशक नकदी जुटाने के लिए अपनी सोने की होल्डिंग बेच रहे हो सकते हैं। चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का बड़ा खरीदार है। ऐसे में वहां से मांग कम होने और सोने की बिकवाली बढ़ने से वैश्विक कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, सोने की गिरावट के लिए केवल चीन की नीतियों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
अमेरिकी ब्याज दरों की आशंका भी बनी वजह
सोने की कीमतों पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का भी असर पड़ रहा है। अमेरिकी GDP ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रहने और महंगाई बढ़ने से फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका मजबूत हुई है।
इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं।
ब्याज दरें बढ़ने से क्यों सस्ता होता है सोना?
सोने पर निवेशकों को किसी तरह का ब्याज नहीं मिलता। वहीं, सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों से नियमित रिटर्न मिल सकता है। ऐसे में जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक सोने के बजाय दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले दिनों में चीन की मांग, अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर सोने की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।